आगरा से इटावा तक सिक्सलेन निर्माण के लिए फीरोजाबाद की सदर एवं जसराना क्षेत्र के करीब 54 गांवों के किसानों ने रविवार को महापंचायत की और 2012 की दरों से भुगतान करने का विरोध किया। वर्तमान सर्किल दरों से छह गुना मुआवजा देने, प्रत्येक परिवार के एक युवक के नौकरी देने की मांग की गई। सात अगस्त को सात सूत्रीय मांगपत्र भी डीएम को सौंपने का निर्णय लिया गया। इस दौरान स्पष्ट कहा गया कि अन्याय किया तो आंदोलन करेंगे।
जलेसर रोड स्थित पीपल चौकी के निकट किसान पंचायत की अध्यक्षता वीरेंद्र कुमार पचौरी ने की। संघर्ष समिति के जिलाध्यक्ष थान सिंह यादव ने कहा कि अन्याय के खिलाफ संघर्ष करना होगा। नोटिस जुलाई 2015 में और भुगतान 2012 की सर्किल दरों से । यह कैसे बर्दाश्त किया जाएगा। राष्ट्रीय किसान एवं नौजवान संगठन जिलाध्यक्ष रामनिवास यादव ने कहा हमें अपनी बात प्रशासन के समक्ष रखनी होगी। हमारा संगठन किसानों के साथ है। जितेंद्र तिवारी ने कहा सैफई के किसानों को दस गुना मुआवजा और फीरोजाबाद के किसानों को कम यह सहन नहीं किया जाएगा। संघर्ष समिति ने सात सूत्रीय मांगपत्र सात अगस्त को सौंपने का निर्णय लिया। संचालन राजवीर सिंह यादव ने किया। पंचायत में प्रभान सिंह यादव, वेद प्रकाश, जयपाल सिंह, नेत्रपाल बघेल, कालीचरन, भूरी सिंह, लोकीराम, राम भरोसी, राजबहादुर कुशवाहा, लाखन सिंह समेत बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे। वहीं भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की अनिल कुमार की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की। मनमाने ढंग से भूमि अधिग्रहण करने का विरोध किया। वक्ताओं ने कहा कि प्रशासन पहले मुआवजा की धनराशि घोषित करे, इाके बाद अधिग्रहण करे। बैठक में रघुवीर सिंह, रामवीर सिंह, रामजीलाल शर्मा, विजय दुर्गपाल सिंह, महावीर सिंह, सुरेश बाबू, मिट्ठूलाल, ऊषा कुमारी, बाबूलाल आदि मौजूद रहे।
किसान संघर्ष समिति का किया गठन
महापंचायत के बाद आंदोलन की धार तेज करने के लिए एनएच-2 भू अधिग्रहण किसान संघर्ष समिति का गठन किया गया। अध्यक्ष थान सिंह यादव, मंत्री मनोज कुमार पचौरी और कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी रामगोपाल कुशवाहा को सौंपी गई। चंद्रपाल बघेल, नौनीपाल सिंह बघेल, प्रदीप पचौरी, कामता प्रसाद कुशवाहा, महेंद्र कुशवाहा, सूरजपाल नेताजी, धर्मेंद्र वर्मा, राजेश उर्फ राजू, टीटू सविता, कृष्णकांत शर्मा, राजेंद्र कुशवाहा, ओम प्रकाश राजपूत, श्यामबाबू, बाबूलाल शर्मा, लाखन सिंह, मवासी लाल शर्मा आदि मौजूद रहे।
किसानों की पंचायत में उठी मांगें
- मौजूदा सर्किल दरों से छह गुना दिया जाए मुआवजा।
- आबादी वाले क्षेत्रों में आबादी के हिसाब से मिले मुआवजा।
- पेड़ एवं ट्यूबवेल आदि की अलग से धनराशि दी जाए।
- भूमिहीन हो रहे किसानों को पट्टे आवंटित किए जाएं।
- प्रभावित किसान परिवारों के एक व्यक्ति को विभाग में नौकरी दी जाए।
- बीपीएल एवं विधवा किसान परिवारों को अतिरिक्त मुआवजा मिले।
- भूमि की सही ढंग से पैमाइश कर अधिग्रहीत की जाए।
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किसान बोले, अन्याय के खिलाफ करेंगे संघर्ष
- हमारी भूमि लो और हमें उचित मुआवजा नहीं मिले, इसे कैसे बर्दाश्त किेया जाएगा। भूमि आज लेंगे और दरें तीन वर्ष पुरानी, इसे नहीं सहेंगे।
कामता प्रसाद उपाध्याय, नगला अनिरुद्ध
- बुजुर्ग होने के बावजूद हम अन्याय के खिलाफ संघर्ष करेंगे। जरूरत पड़ने पर भूख हड़ताल की जाएगी।
वीरेंद्र कुमार पचौरी, पचवान
- हमारी भूमि हमसे जबरन नहीं छीनी जा सकती। हमें आज की दरों की छह गुना मुआवजा दिया जाए।
रामगोपाल सिंह, कुतुकपुर चनौरा
- भूमि लेने में प्रशासन एवं एनएच-टू के लिए अधिकारी मनमानी कर रहे हैं। इसके खिलाफ संघर्ष किया जाएगा।
राजपाल माहौर, मुईनउद्दीनपुर
खत्ताघर का निर्माण अटका
फीरोजाबाद पालिका के रहते हुए कोटला रोड स्थित ग्राम कुतुकपुर चनौरा में 5.265 हेक्टेयर भूमि का चिह्नांकन 2008 में कर लिया गया था। इसके बावजूद अब तक कब्जा नहीं लिया जा सका है। इसका प्रमुख कारण किसान तय दरों पर मुआवजा लेने को तैयार नहीं हैं। निगम प्रशासन ने दरों को बढ़ाने के ही साथ मुआवजा राशि भेजने को पत्र भेजा है। मुआवजा के आने के बाद ही इसकी प्रक्रिया शुरू होगी।
भूमि अभाव में अटका ट्रांसपोर्ट नगर
सुहागनगरी में ट्रांसपोर्ट नगर की स्थापना की पहल डेढ़ दशक पूर्व हुई थी। पहले लालऊ के समीप भूमि का चयन हुआ। बाद में स्थान बदला गया और नागऊ के समीप चिह्नांकन के साथ भूमि अधिग्रहण को विप्रा ने मुड्डी लगा दी। हालांकि किसानों के विरोध के चलते आखिरकार ट्रांसपोर्ट नगर की भी स्थापना नहीं हो सकी।
आवास विकास परिषद नहीं बना सका कालोनी
विधानसभा चुनाव से पूर्व अलीनगर कैंजरा एवं मिलिख जहांपुर के किसानों ने जोरदार आंदोलन किया। किसानों के आंदोलन के चलते आखिर में आवास विकास परिषद की कालोनी की स्थापना का काम अधर में लटक गया। विरोध होता देख विभाग ने कदम पीछे खींचे।
जेड़ाझाल परियोजना में बाधक
सुहागनगरी को पानी की किल्लत से मुक्ति दिलाने को ही जेड़ाझाल परियोजना के तहत नंदपुर तक नहर को बनाने के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया अभी तक पूर्ण नहीं हो सकी है। कई स्थानों पर किसानों का विरोध का सामना करना पड़ रहा है। इसके कारण काम बीच-बीच में अटका हुआ है। उम्मीद नहीं है कि समय रहते यह परियोजना पूर्ण हो सके।
किसानों ने खटखटाया सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा
आगरा-लखनऊ ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस वे में जिले के 31 गांवों के किसानों की भूमि ली गई है। अधिकांश किसानों ने भूमि का बैनामा कर दिया लेकिन नगला गुलाल के साथ ही कुछ किसानों ने मुआवजा लेने के स्थान पर सैफई की दरों के अनुरूप मुआवजे की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट तक दौड़ लगा दी है। हालांकि प्रशासन ने अपने अधिकारों का प्रयोग करते हुए भूमि कब्जे में कर ली। लेकिन देर सवेर फैसला उलटा तो बाधा खड़ी होगी।