लालबत्ती का सपना लेकर जिला पंचायत सदस्य बने सैफई परिवार के रिश्तेदारों में अब रार मची हुई है। मुलायम सिंह के समधी और सिरसागंज विधायक के पुत्र को टिकट मिलते ही सपा ने अटकलों पर विराम तो लगा दिया लेकिन अन्य रिश्तेदारों की दुहाई तेज हो गई। दावेदारों की गाड़ियों ने सैफई और लखनऊ का रुख किया। कोई रिश्तेदारी का हवाला दे रहा था तो कोई पार्टी के प्रति वफादारी का। कुछ ने नाराजगी जताते हुए इस फैसले का विरोध भी किया। विरोधी खेमे ने कई सदस्यों से संपर्क साधना शुरू कर दिया है।
लालबत्ती को लेकर सपा हाईकमान का फैसला मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के रिश्तेदारों के गले नहीं उतर सका। हाईकमान ने जो निर्णय लिया सैफई हाउस के करीबियों को इसकी उम्मीद कतई नहीं थी। सैफई परिवार के समधी जसराना विधायक रामवीर यादव के पुत्र अमोल यादव भी दावेदारों की सूची में थे। वहीं सपा सांसद धर्मेंद्र यादव के बहनोई राजीव यादव की मां और पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष रामसिया यादव भी टिकट मांग रही थीं। इससे इतर धर्मेंद्र यादव के दूसरे बहनोई अनुजेश प्रताप यादव भी प्रबल दावेदार माने जा रहे थे। गुटबंदी से बचने के लिए सुल्तान सिंह यादव का नाम भी सुर्खियों में रहा। इससे इतर सपा मुखिया के समधी सिरसागंज विधायक ने बाजी मार ली और अपने पुत्र छोटू यादव को टिकट दिलाने में कामयाब रहे। पार्टी सूत्रों की माने तो विरोधी खेमे ने अंदरखाने ही सदस्यों की घेरेबंदी करनी शुरू कर दी है। इसमें कोई और नहीं बल्कि सैफई हाउस के एक दामाद की सक्रिय भूमिका निभाने की खबर है। उसके पीछे पार्टी के कई नेता शामिल हैं। बताते हैं कि हाईकमान ने पहले उन्हें लालबत्ती का हकदार बनने का आश्वासन भी दिया था। सत्ताधारी दल के कई नेता एकजुट होकर एक पूर्व विधायक के परिवार के सदस्य को प्रत्याशी बनाने की रणनीति में जुट गए हैं। खबर तो यहां तक है कि इस दर्द को बंटाने में विरोधी दलों के नेता भी सक्रिय हो गए। अब देखना यह है कि सपा हाई कमान समझौता कराने में सफल होगा या फिर टकराव की नौबत आएगी। वहीं दूसरी ओर सपा मुखिया और सरकार के दरबार में जिले के दावेदारों की हाजिरी बढ़ गई है। पूर्व विधायक रामवीर सिंह और उनके बेटे अमोल यादव ने मंगलवार को सपा मुखिया से मुुलाकात की तो विजय प्रताप छोटू आशीर्वाद लेने प्रोफेसर रामगोपाल के घर पहुंचे। बताते चलें कि जिला पंचायत चुनाव के बाद सदस्यों को प्रमाण पत्रों के वितरण के दौरान समाजवादी पार्टी दो धड़ों में बंटी दिखाई दी। इतना ही नहीं जिले के दो कद्दावर नेता अलग-अलग टोली में दिखाई दिए थे। सपा हाईकमान का बयान आया कि जिला पंचायत अध्यक्ष का प्रत्याशी पार्टी तय करेगी। इसके साथ ही उम्मीद लगाई जा रही थी कि पार्टी आपसी विवाद से बचने के लिए किसी तीसरे पर दांव लगा सकती है लेकिन हाईकमान ने ऐसा नहीं किया।
छोटू के निर्विरोध अध्यक्ष बनने की चर्चाएं तेज
सपा से जिला पंचायत अध्यक्ष पद के घोषित हुए प्रत्याशी विजय प्रताप उर्फ छोटू के ग्रुप ने उनके निर्विरोध निर्वाचित होने की चर्चाएं तेज कर दी हैं। समर्थकों का कहना है कि जब पार्टी हाईकमान ने निर्णय ले लिया तो फिर खिलाफ कौन जाएगा। विपक्षी दलों के पास तो कोई दमदार प्रत्याशी नहीं है।