शिकोहाबाद। लाखों रुपये खर्च करने के बाद नगर पालिका प्रशासन सुप्रीम कोर्ट में आखिर बैकफुट पर आ गई। इलाहाबाद हाईकोर्ट से मिली हार के बाद नगर पालिका प्रशासन की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका तो दायर की गई लेकिन हार के डर से पालिका की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता ने 17 नवंबर को मुकदमा वापसी की अर्जी लगा दी। पालिका के बैकपुट पर आने के बाद नगर पालिका क्षेत्र में गृहकर-जलकर वसूली में हाईकोर्ट का आदेश प्रभावी रहेगा। अब प्रदेशभर में कोई पालिका अथवा नगर पंचायत गृहकर व जलकर बढ़ी दर से वसूली नहीं कर सकेगी। हाईकोर्ट ने आदेश दिया था पालिका सभी वादीगणों को 50 -50 हजार रुपये का हर्जाना और वसूली रकम 10 प्रतिशत ब्याज के साथ वापस करेगी।
पालिका के खिलाफ हाईकोर्ट एवं सुप्रीमकोर्ट में लड़ाई लड़ने वाले मुख्य वादी रमेश चंद्र अग्रवाल, दीपांकर अग्रवाल, देवेश कुमार जादौन, रतन भाई जैन और उच्च न्यायालय के अधिवक्ता हरेराम त्रिपाठी ने शुक्रवार को पत्रकार वार्ता में बताया कि नगर पालिका परिषद ने वर्ष 2012-13 में मनमाने तरीके से सामान्य कर में 12 के गुणांक का प्रयोग करते हुए 144 गुना संपत्ति कर की वसूली चालू कर दी थी। आरोप है कि पालिका द्वारा वसूली प्रमाणपत्र भेज कर अमीनों एवं पुलिस द्वारा अमानवीय व विधि विरुद्ध हथकंडे अपना कर जबरन वसूली की गई। इस पर रमेशचंद्र व अन्य हाईकोर्ट गए और पालिका के विरुद्ध याचिका दायर की।
उच्च न्यायालय ने 14 सितंबर 2016 को पारित आदेश द्वारा बिना नियमों के बने संपत्ति कर की वसूली को अवैध घोषित करके याचिका दायर करने वाले व्यक्तियों से वसूली धनराशि को दस प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित वापस करने के आदेश दिए थे। वादीगणों को पचास-पचास हजार रुपये का हर्जाना देने के आदेश दिए थे। अधिवक्ता हरेराम त्रिपाठी ने बताया कि उच्च न्यायालय में पैरवी के दौरान पालिका का लाखों रुपया खर्च हो गया। मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा तो भी हम हारे नहीं लेकिन 17 नवंबर को तारीख में पालिका की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता ने याचिका वापस ले ली। अधिवक्ता हरेराम त्रिपाठी ने कहा कि पालिका द्वारा याचिका वापस लेने के साथ 11 मार्च 2011 के अधिनियम के बाद वसूला गया संपत्ति कर अवैध हो गया। वादी रमेश चंद्र अग्रवाल ने बताया उन्होंने हरेराम त्रिपाठी, अंचल टिकमानी, असीम कुमार कटोच, मनोज मिश्रा सहित 13 अधिवक्ताओं को पक्ष खड़ा किया था।
- नगर पालिका की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ न होने के कारण पैरवी करना संभव नहीं था। गृहकर-जलकर की वसूली न होने के कारण और राज्य वित्त में अत्यधिक कटौती होने के कारण पालिका की स्थित दयनीय हो गई है। इस कारण सर्वोच्च न्यायालय में मामले में पैरवी किया जाना संभव नहीं था। पालिका द्वारा शासन से पत्रचार कर पुरानी वसूली को बहाल करने की मांग की जा चुकी है। शासनादेश आते ही पालिका पुरानी दर से वसूली शुरू कर देगी।
अवधेश कुमार ईओ, नगर पालिका, शिकोहाबाद।