शेरा की हत्या करने का उद्देश्य क्या था? वारदात को अंजाम देने वाले लोग कौन थे? शव को गोलियों से छलनी करने का राज क्या था? यह सभी सवाल रहस्य बने है। इन सभी सवालों के जवाब तलाशने के लिए पुलिस ने अभी जांच तक शुरू नहीं की है। पुलिस पंचायत चुनाव से फुर्सत पाने के बाद कार्रवाई करने की बात कह रही है। ऐसे में कहीं हत्यारोपी पुलिस की पकड़ से दूर न हो जाए और शेरा हत्याकांड एक रहस्य न बन जाए।
लाइनपार क्षेत्र के गांव ढोलपुरा निवासी सोनवीर के पुत्र शेरा ने मां निर्मला की मौत के बाद अपराध की दुनिया में कदम रखा। इसके बाद वह लूट, हत्या और अपहरण के साथ चौथ वसूली जैसी वारदातों को अंजाम देने लगा। तीन मार्च 2015 को पूर्व प्रधान गणेश यादव की हत्या के बाद शेरा का नाम एक बार फिर से सुर्खियों में आ गया। पुलिस रिकोर्ड में भगोड़ा अपराधी घोषित होने के बाद भी वह फीरोजाबाद में पनाह पाए रहा, लेकिन खाकी को इसकी जानकारी तक नहीं हो सकी। 28 नवंबर की सुबह इटौली गांव के मार्ग पर उसकी गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई। घटना को तीन दिन बाद भी खाकी कातिलों के गले बान तक तो दूर वह यह तक पता नहीं लगा सके कि शेरा को ऐसी दर्दनाक मौत देने वाले कातिल कौन थे?
और इसके पीछे उनका उद्देश्य क्या रहा? सूत्रों की मानें तो इस घटना के पीछे गैंगवार भी बू भी झलक रही है। इस बात को पुलिस भी दबी जुबान से स्वीकार भी कर रही है। इसका खुलासा पुलिस जांच के बाद करने की बात कह रही है। ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि पंचायत चुनाव में खाकी की व्यस्तता कहीं शेरा के कातिलों को इतना दूर न कर दें। इस हत्याकांड में पुलिस की जांच की रफ्तार और पैरवी न करने वाले व्यक्ति की कमी का लाभ भी हत्यारोपियों को मिल सकता है।