शरई कानून काो लेकर हुए जलसे में भीड़
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जमीयत ए उलमा हिंद की ओर से शरीयत कानून में दखलंदाजी के विरोध में हुसैनी मैदान में जलसा आयोजित किया। वक्ताओं ने कहा कि सरकार विकास छोड़कर बाकी बातों पर ध्यान दे रही है। जलसे के बाद राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन नगर मजिस्ट्रेट सुरेंद्र बहादुर यादव को सौंपा।
लखनऊ से आए मौलाना अब्दुल अलीम फारुकी ने कहा किअल्लाह के बनाए कानून में कोई तब्दीली बर्दाश्त नहीं होगी। शहर मुफ्ती अब्दुल अलीम ईसा की सदारत में हुसैनी मैदान में आयोजित जलसे में कहा कि कुछ फिरकापरस्त ताकतें शरीयत कानून में बदलाव की हिमाकत कर रहे हैं। इस्लाम को मानने वाले बदलाव नहीं सहेंगे। कानपुर से आए मौलाना अब्दुल कद्दूस ने कहा कि हिंदुस्तान के कानून को हम मानते हैं पूरा सम्मान करते हैं। अपने वतन से हम भी उतनी ही मुहब्बत करते हैं जितनी की बाकी लोग। देश को आजाद कराने वालों में मुस्लिमों ने कुर्बानियां दीं। मौलाना असद सामी ने कहा कानून में बदलाव किया तो विरोध करेंगे।
संचालन मौलाना अमीन अख्तर ने किया। मुस्लिम स्टूडेंट्स आर्गेनाइजेशन के मौलाना मुजफ्फर हुसैन की सदारत में मस्जिद फारुकिया सदर बाजार में बैठक हुई। इसमें मौलाना मुजफ्फर हुसैन ने कहा कि शरीयत ए मुस्तफा में सरकार कोई दखलंदाजी नहीं करे। क्योंकि यह कानून मुसलमानों के कुरआन व हदीस से बना है। हाफिज इमरान ने कहा कि काला कानून जबरन थोपा गया तो बर्दाश्त नहीं करेंगे। संगठन के अध्यक्ष उवैश आदिल कादरी ने मोदी सरकार तो बदल सकती है लेकिन शरई कानून नहीं। एडवोकेट आजम तथा मुनीर अहमद उवैसी, जैनुल अख्तर बरकाती, मुहम्मद नदीम, इरफान अंसारी, मुहम्मद शुएब, हाफिज हसनैन, मु. नासिर मौजूद थे।
जलसे में महिलाएं भी हुई शामिल
जलसे में काफी संख्या में मुस्लिम महिलाएं शामिल हुई। हाथों में भाजपा, आरएसएए के ही साथ बजरंग दल के खिलाफ नारों से अंकित तख्तियां थामे हुए थीं। उन्होंने शरीयत कानून में बदलाव का विरोध किया। केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।