नार्थ ईस्ट राज्य मणिपुर इन दिनों हिंसा की आग में जल रहा है। पक्ष एवं विपक्ष एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगा रहे है। जातीय दंगों से विस्थापित बच्चे अपनी स्कूली शिक्षा जारी रख सके इसके लिए संघ ने ऐसे ही 30 बच्चों की परवरिश करने का जिम्मा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने उठाया है।
मणिपुर में हुई हिंसा के बाद जनजाति बाहुल्य इलाकों के लोगों के सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा होने के साथ बच्चों के लालन-पालन का संकट आ गया है। ऐसे में नौ से 14 वर्ष तक के 30 बच्चों की परवरिश का जिम्मा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रकल्प सेवा विभाग द्वारा लिया गया है। बच्चों को मणिपुर से लाकर उन्हें संघ के प्रकल्प महर्षि दयानंद आर्ष गुरुकुल आश्रम पलिया बहत में रखा जाएगा। गुरुकुल में बच्चों के खाने-पीने के साथ रहने एवं पहनने का पूरा प्रबंध किया जाएगा। इस दौरान बच्चों को वैदिक शिक्षा के साथ आधुनिक शिक्षा देकर उन्हें काबिल बनाने का कार्य किया जाएगा।
- जसराना के महर्षि दयानंद आर्ष गुरुकुल में रहकर शिक्षा ग्रहण करेंगे बच्चे
- 31 जुलाई को आश्रम में पहुंचेंगे 30 बच्चें
- 31 जुलाई को गुरुकुल पहुंचेंगे बच्चे
जसराना। संघ के पदाधिकारी 30 बच्चों को लेकर 31 जुलाई को गुरुकुल में पहुंचेंगे। इस दौरान उनके साथ सात बच्चों के अभिभावक भी मौजूद रहेंगे। बच्चों को लाने की पूरी कानूनी प्रक्रिया पूरी कर ली गई। बच्चों के स्वागत की तैयारियां गुरुकुल में की जा रही है। गुरुकुल में नार्थ ईस्ट के पहले से ही 45 बच्चे अध्ययन कर रहे हैं। जिनमें असम, त्रिपुरा, मेघालय जैसे राज्यों के बच्चे शामिल है।
- 2010 से संचालित हो रहा है गुरुकुल
जसराना। जसराना के पलिया बहत में 2010 में महर्षि दयानंद आर्ष गुरुकुल की नींव रखी गई थी। स्थापना के बाद से ही गुरुकुल में नार्थ इस्ट के बच्चों को वैदिक परंपरा के साथ आधुनिक शिक्षा प्रदान की जाती है।
- जनसहयोग से संचालित होता है गुरुकुल
जसराना। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सेवा विभाग द्वारा संचालित गुरुकुल का संचालन जनसहयोग के माध्यम से होता है। गुरुकुल में सहयोग देने वालों में व्यापारी, अधिकारी, जनप्रतिनिधि एवं आम इंसान भी शामिल है।
संघ द्वारा संचालित गुरुकुल में मणिपुर के हिंसाग्रस्त क्षेत्रों से 30 बच्चे गुरुकुल में 31 जुलाई को पहुंचेंगे। गुरुकुल में आधुनिक शिक्षा के साथ भारतीय संस्कृति एवं सभ्यता का ज्ञान कराया जाता है।
- राघवेंद्र सिंह, संचालक गुरुकुल -