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सेफ-बर्थ रिस्पांस टीम पर सुरक्षित प्रसव की जिम्मेदारी 

Mon, 02 May 2016 11:22 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला फीरोजाबाद
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चिकित्सक
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 विगत माह आयोजित मातृत्व सप्ताह के दौरान चिकित्सा विभाग ने गर्भवती महिलाओं का चिह्नीकरण तो किया, लेकिन इसके बाद गर्भवती महिलाओं की सुध नहीं ली। अभियान के दौरान लगभग 30 हजार गर्भवती महिलाओं का पंजीकरण किया गया। इनमें लगभग 1400 को हाई-रिस्क श्रेणी में चिह्नित किया गया है। 
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  शासन ने हाई रिस्क प्रेगनेंट महिलाओं के सुरक्षित प्रसव के लिए डाक्टरों की सेफ-बर्थ रिस्पांस टीमों के गठन किया है। सेफ-बर्थ रिस्पांस टीमों में एक स्त्री रोग विशेषज्ञ, जनरल सर्जन, निश्चेतक, बाल रोग विशेषज्ञ के अलावा एक महिला चिकित्सक की भी नियुक्ति की गई है। यह टीमें जनपद में फर्स्ट रेफरल यूनिट के तौर पर चिह्नित अस्पतालों में सप्ताह में दो दिन मौजूद रहेंगी। सीएमओ डा. पुष्कर आनंद ने बताया कि विगत माह मातृत्व सप्ताह के दौरान करीब 30 हजार गर्भवती महिलाओं का पंजीकरण किया गया था। इनमें से 1400 से अधिक महिलाएं हाई रिस्क श्रेणी की थीं। जिला महिला चिकित्सालय, संयुक्त चिकित्सालय शिकोहाबाद, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र टूंडला, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को फर्स्ट रेफरल यूनिट के तौर पर चिह्नित किया गया है। एसबीआरटी टीमें इन तीनों अस्पतालों पर सप्ताह में दो दिन मौजूद रहेंगी। संबंधित चिकित्सा अधिकारी हाई रिस्क प्रेगनेंसी वाली महिलाओं को प्रसव की संभावित तिथि से पूर्व ही एफआरयू पर भर्ती कराएंगे। निर्धारित तिथि पर महिलाओं का सुरक्षित प्रसव कराया जाएगा। आवश्यक होने पर सिजेरियन ऑपरेशन भी किया जाएगा।

 हाई रिस्क में भी बनाई है चार कैटेगरी
हाई रिस्क प्रेगनेंसी महिलाओं को ए, बी, सी और डी चार श्रेणियों में विभाजित किया गया है। ए श्रेणी में उन महिलाओं को रखा गया है, जिन्हें पूर्व में मृत शिशु पैदा हुआ हो अथवा प्री-मैच्योर डिलीवरी हुई हो। वहीं बार-बार गर्भपात होने के कारण नवजात के ब्लड ग्रुप में आरएच संबंधी विकार वाली महिलाओं को भी इसी श्रेणी में रखा गया है। बार-बार गर्भपात, प्लेसेंटा में विकृति, छठवीं बार गर्भवती होने वाली महिलाओं अथवा मधुमेह या एनीमिया जैसे रोगों से पीड़ित महिलाओं को बी-श्रेणी में रखा गया है। सी-श्रेणी में 15 वर्ष से कम अथवा 36 वर्ष से अधिक आयु की गर्भवती महिलाओं को रखा गया है। 145 सेंटीमीटर से कम लंबाई की महिलाओं को भी इस श्रेणी में रखा गया है। डी-श्रेणी में गंभीर एनीमिया उच्च रक्तचाप हृदय रोग, एपिलेप्सी, टीबी अथवा थायराइड संबंधी रोग से ग्रसित महिलाओं को रखा गया है। 
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