कथा व्यास पंडित मुन्ना लाल शास्त्री ने श्रीमद्भागवत कथा के दौरान रुक्मिणी एवं भगवान श्रीकृष्ण के विवाह की लीलाओं का वर्णन सुनकर श्रद्धालुजन भाव विभोर हो गए। शाम को आरती के बाद प्रसाद वितरण किया गया।
सदर बाजार स्थित मंदिर श्री राधाकृष्ण महाराज की 117वीं वर्षगांठ पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा एवं ज्ञान यज्ञ में पंडित मुन्नालाल शास्त्री ने कहा भगवान को ज्ञान, तप, योग और जप प्रिय नहीं है अपितु ईश्वर सिर्फ भाव का भूखा है। उन्होंने कहा कि रुक्मिणी का विवाह उनका भाई शिशुपाल से करना चाहता था लेकिन रुक्मिणी ने भाव भरी पाती भगवान श्रीकृष्ण को भेजी। इस पर भगवान श्रीकृष्ण खुद ही दौड़े-दौड़े चले आए और रुक्मिणी से विवाह रचाया। उन्होंने राधा-कृष्ण के बारे में समझाते हुए कहा कि राधाकृष्ण का मिलन परमात्मा का मिलन है। रुक्मिणी विवाहोत्सव की लीला सुनकर श्रद्धालुजन भाव विभोर होकर नृत्य करने लगे। कइयों ने रुक्मिणी का कन्यादान किया। इस दौरान अनिल कुमार पालीवाल, सुधीर कांत शर्मा, प्रमोद गुप्ता, रमेश बंसल, मोहन किशोर गुप्ता, पिंटू पालीवाल, सत्यवीर गुप्ता, सतीश चंद्र गुप्ता, पंडित विजय उपाध्याय, अनुग्रह गोपाल अग्रवाल आदि मौजूद रहे।