चूड़ी कारखानों में 1200 से 1300 डिग्री तापमान पर धधकती भट्ठियां, भट्ठियों के आसपास का तापमान चार सौ से पांच सौ डिग्री के बीच। कारखानों के अंदर तापमान बाहर के सामान्य तापमान से तीन से चार डिग्री अधिक है। इन दिनों श्रमिक 48 से 50 डिग्री तापमान के बीच काम कर रहे हैं। इसका असर उत्पादन क्षमता पर पड़ रहा है। चूड़ियों का उत्पादन दस से पंद्रह प्रतिशत तक गिर गया है। इस बार गर्मी अप्रैल माह से ही तेवर दिखाने लगी थी इस कारण उत्पादन पर अधिक असर पड़ा है।
देश-दुनिया में कांच की खनखनाती चूड़ियां सुहाग नगरी की पहचान हैं। चूड़ियों के इस शहर में इस समय लगभग 70 कारखाने चल रहे हैं। कारखानों में जिस पाट फर्नेश में कांच को पिघलाया जाता है उसका तापमान 1200 से 1300 डिग्री तक रहता है। भट्ठी के बाहर का तापमान चार-सौ से पांच सौ डिग्री तक रहता है। इस समय बाहर का तापमान लगभग 45 डिग्री है जबकि कारखानों के अंदर का तापमान 46 से 48 डिग्री है। इस तपती गर्मी में श्रमिकों के काम करने की क्षमता भी घट गई है। इसका असर चूड़ी उत्पादन पर पड़ रहा है। अप्रैल से अब तक चूड़ी का उत्पादन दस से पंद्रह प्रतिशत तक घट गया है। इस सीजन में आने वाले पर्वों की तैयारी करते हुए चूड़ियां बनती हैं। देश के दक्षिण क्षेत्रों में मेला आदि शुरू हो जाते हैं तो सहालग की तैयारियां भी शुरू हो जाती हैं। ऐसे में उत्पादन का गिरना कारखानेदारों को भी अखर रहा है।
चूड़ी उत्पादक पीके झिंदल कहते हैं इस बार गर्मी ने अप्रैल से ही तल्खी दिखाना शुरू कर दी। अब बरसात होने के बाद ही कारखानों में उत्पादन ढर्रे पर आ पाएगा। कारखानेदार ललेतश जैन का कहना है कि अब तो गैस से भट्ठियां चल रही हैं इसके काफी राहत है। जब कोयला का प्रयोग होता था जब स्थिति और भी गंभीर हो जाती थी। वैसे अब कारखानों में कूलर आदि लगाकर तापमान को कम भी किया जा रहा है।
वर्तमान में संचालित चूड़ी कारखाने - 70
एक कारखाने में काम करने वाले श्रमिक - ढाई सौ से तीन सौ
चूड़ी की जुड़ाई आदि से जुडे़ श्रमिक - लगभग तीन सौ