हृदय रोग बच्चोें को चपेट में ले रहा है। देशभर में 2.8 लाख बच्चे इस जानलेवा बीमारी के शिकार हैं। इसकी रोकथाम के लिए भारत सरकार ने एनसीडी और बाल स्वास्थ्य पोषण अभियान के तहत नए प्रोजेक्ट की शुरुआत की है। पायलट प्रोजेक्ट के रूप में देश में तीन जिलों को चयनित किया है। यूपी के फीरोजाबाद जिले से इस अभियान की शुरुआत की गई है। धीरे-धीरे यह मिशन सभी जिलों में लागू होगा।
केंद्र सरकार के सर्वे में पांच से 15 आयु वर्ग के एक हजार बच्चों में से एक बच्चे को रियूमेटिक हृदय रोग का शिकार पाया। इस पर केंद्र सरकार ने पहले पायलट प्रोजेक्ट के रूप में मध्य प्रदेश, यूपी और बिहार के एक एक जिले को चयनित किया है। फीरोजाबद जिला यूपी का एकमात्र जिला है, जहां रियूमेटिक हृदय रोग की जांच और इलाज संभव होगा। जिला अस्पताल में यूनिट स्थापित की जाएगी। इधर, सीएचसी और स्कूलों में भी समय समय पर जांच की जाएंगी। शासन अलग से इस प्रोजेक्ट के लिए बजट जारी करेगा। गुरुवार को शिवम होटल में जिले में सरकारी और प्राइवेट सेक्टर के चिकित्सकों की कार्यशाला हुई। जिसमें भारत सरकार स्वास्थ्य सरकार डा. चिन्मयदास, ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट दिल्ली की प्रोफेसर डा. अनीता सक्सेना, डा. आनंद कृष्णन, डब्ल्यूएचओ ऑफिसर डा. प्रदीप जोशी, स्वास्थ्य डायरेक्टर लखनऊ डा. आलोक कुमार ने इस पायलट प्रोजेक्ट के बारे में चिकित्सकों को बताया। कहा, कि अगर बच्चा स्वस्थ्य होगा तो समाज भी स्वस्थ रहेगा। कार्यशाला में सीएमओ डा. पुष्कर आनंद, एसीएमओ डा. एसकेएस राना, डा. मुकेश, डीपीएम सरजू खान आदि मौजूद रहे।
किस तरह होता है यह रोग
इसमें घुटनों, कोहनी, एड़ी, कलाई जोड़ों में बिना बुखार के सूजन आना इसके मुख्य लक्षण हैं। वहीं दो से ज्यादा सप्ताह तक गले में खरास रहना भी रोग बढ़ाता है। बुखार आने के बाद यह हृदय रोग में परिवर्तित हो जाता है। यह बीमारी हृदय की मांसपेशियों को कमजोर कर देती हैं।