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UP: सेवानिवृत्त फौजी को डिजिटल अरेस्ट कर ठगे दो लाख, बैंक प्रबंधक ने दिखाई सतर्कता; बच गए ढाई लाख रुपये

Mon, 16 Feb 2026 10:25 PM IST
अरुन पाराशर संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद

सार

ठगों ने सेवानिवृत्त फौजी को डिजिटल अरेस्ट करते हुए फोन नहीं काटने दिया। कैमरे के सामने रहने का दबाव बनाया। बदनामी के डर से कुल दो लाख रुपये बताए गए क्यूआर कोड के जरिए भेज दिए। और रुपयों के लिए बैंक पहुंचने पर मामला खुल सका। 
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cyber crime cyber fraud - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
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फौज में तैनात बेटे पर सामूहिक दुष्कर्म का आरोप लगाकर साइबर ठगों ने एक सेवानिवृत्त फौजी को डराया-धमकया और डिजिटल अरेस्ट कर दो लाख रुपये ऐंठ लिए। ढाई लाख रुपये की और मांग की। एटा रोड स्थित रामनगर निवासी पूर्व फौजी नरोत्तम सिंह (70) पैसे निकालने जब बैंक पहुंचे तो प्रबंधक ने उनकी घबराहट भांप ली। पूछताछ की तो उन्होंने पूरा मामला बताया। प्रबंधक ने तत्काल उनके खाते से लेनदेन बंद करा दिया। इससे वह आगे की ठगी से बच गए।
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सेवानिवृत्त फौजी नरोत्तम सिंह को साइबर ठगों ने एक घंटे से अधिक समय तक डिजिटल अरेस्ट रखा। पीड़ित ने बताया, उनका बेटा राहुल सेना में क्लर्क है और वर्तमान में जोधपुर में तैनात है। सोमवार सुबह उन्हें व्हाट्सएप पर एक वीडियो कॉल आई। कॉल उठाने पर स्क्रीन पर पुलिस की वर्दी पहने एक शख्स दिखा, जिसने खुद को जोधपुर का इंस्पेक्टर बताते हुए कहा कि एक युवती से दुष्कर्म के मामले में उनका बेटा राहुल दोस्तों संग गिरफ्तार हुआ है।

उसने बताया कि दुष्कर्म दोस्तों ने किया है लेकिन राहुल भी फंस गया है। मेडिकल और अन्य खर्चे के लिए अगर वह तत्काल 4.50 लाख रुपये भेज देते हैं तो राहुल को बचा लिया जाएगा। ठगों ने उन्हें डिजिटल अरेस्ट करते हुए फोन नहीं काटने दिया और कैमरे के सामने रहने का दबाव बनाया। बदनामी के डर से उन्होंने पहले 20 हजार, फिर 30 हजार रुपये भेज दिए। फिर अपने दामाद से 50 हजार और एक अन्य रिश्तेदार से करीब एक लाख रुपये मंगवाकर कुल 2 लाख रुपये बताए गए क्यूआर कोड के जरिए भेजे।
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बैंक प्रबंधक ने दिखाई समझदारी
ठग साढ़े चार लाख रुपये लेने की जिद पर अड़े थे। बाकी के ढाई लाख रुपये खाते से निकालने के लिए नरोत्तम सिंह बदहवास हाल में पंजाब एंड सिंध बैंक की टूंडला शाखा पहुंचे और जल्द रकम निकासी का प्रयास करने लगे। उनकी घबराहट देखकर बैंक प्रबंधक को शक हुआ। प्रबंधक ने जब पूछताछ की तो पूरी कहानी सामने आ गई। उन्होंने तत्काल खाते से लेनदेन रुकवाया और परिवार से बात करने को कहा। जब जोधपुर में पुत्रवधू से बात हुई तो पता चला कि बेटा राहुल सुरक्षित है और ड्यूटी पर है। इसके बाद नरोत्तम ने राहत की सांस ली और खुद के साथ ठगी होने का अहसास हुआ। सीओ टूंडला अरुण कुमार चौरसिया ने बताया कि मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। पीड़ित की ओर से कोई तहरीर नहीं मिली है। संभवत: पूर्व फौजी ने साइबर थाने में तहरीर दी होगी। अभी तक इसकी जानकारी मेरे पास नहीं आई है।

डिजिटल अरेस्ट जैसा कुछ नहीं होता, ऐसे बचें
डिप्टी एसपी साइबर सुरक्षा चंचल त्यागी ने बताया कि साइबर अपराधी इन दिनों पुलिस, सीबीआई या कस्टम अधिकारी बनकर लोगों को डरा रहे हैं जबकि डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं है। खुद को सुरक्षित रखने के लिए इन बातों का ध्यान रखें कि पुलिस या कोई भी सरकारी एजेंसी कभी भी व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर पूछताछ या गिरफ्तारी की धमकी नहीं देती। अगर कोई अधिकारी कॉल पर सेटलमेंट या पैसे ट्रांसफर करने की बात करे तो समझ लें कि वह 100 फीसदी ठग है। अगर आपके किसी परिजन के बारे में ऐसी सूचना मिले तो घबराने के बजाय सीधे उस परिजन या उनके कार्यस्थल पर कॉल करके सच्चाई जानें। ठग आपको कैमरा बंद न करने की धमकी देते हैं। डरे नहीं, तुरंत कॉल काटें और नंबर ब्लॉक करें। यदि ठगी हो जाए तो बिना देरी किए 1930 पर कॉल करें या www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं।

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