राम मंदिर ट्रस्ट की नई सदस्य डाॅ. निर्मला यादव ने राम मंदिर में चोरी के प्रकरण पर कहा कि अभी उन्हें जिम्मेदारी मिली है। ट्रस्ट की बैठक में हर मुद्दे पर विचार किया जाएगा। जांच रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। परिस्थितियां कैसी भी हों, भगवान राम के प्रति जनमानस की आस्था और श्रद्धा अटल रहनी चाहिए।
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ट्रस्टी बनाए जाने के बाद डॉ. निर्मला यादव बृहस्पतिवार को महात्मा गांधी (एमजी) कॉलेज पहुंचीं। उन्होंने पंडित बाल बिहारी लाल की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। उन्होंने ट्रस्ट में मिली नई जिम्मेदारी, मंदिर प्रबंधन में महिलाओं की भागीदारी और विभिन्न प्रासंगिक मुद्दों पर विचार साझा किए।
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डॉ. निर्मला यादव ने बताया कि उन्हें ट्रस्टी बनाए जाने की जानकारी अचानक मिली। ट्रस्ट की ओर से व्हाट्सएप मैसेज भेजकर न्यासी बनने की सूचना दी गई और सहमति मांगी गई। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने इस पद के लिए कोई आवेदन नहीं किया था। हालांकि पूर्व में बायोडाटा जरूर मांगा गया था। उन्होंने कहा, कभी नहीं सोचा था कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में इतनी बड़ी जिम्मेदारी मिलेगी, यह मेरे लिए अत्यंत खुशी और गर्व की बात है। अपने प्राचार्या कार्यकाल का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं किया।
महिलाओं की भूमिका पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि ट्रस्ट में महिलाओं की भागीदारी बेहद जरूरी है और महिलाओं के दृष्टिकोण को समझने के लिए उनकी संख्या और बढ़नी चाहिए। राम मंदिर में चोरी के प्रकरण पर कहा कि अभी उन्हें जिम्मेदारी मिली है, ट्रस्ट की बैठक में हर मुद्दे पर विचार किया जाएगा और जांच रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। परिस्थितियां कैसी भी हों, भगवान राम के प्रति जनमानस की आस्था और श्रद्धा अटल रहनी चाहिए।
कार्यक्रम में सदर विधायक मनीष असीजा, राजेश्वर बंसल, प्रदीप मित्तल, प्रदीप गुप्ता, राजकुमार मित्तल, अनिल उपाध्याय, हनुमान प्रसाद गर्ग, किशोर अग्रवाल, आशीष अग्रवाल, धर्मेंद्र शर्मा, महाविद्यालय अध्यक्ष धर्मेंद्र नाथ शर्मा, पीके जिंदल, मोहनलाल जिंदल, अनूप चंद जैन, अनुपम गुप्ता और सतीश चंद्रा सहित शिक्षक आदि मौजूद रहे।
प्रो. निर्मला यादव का पारिवारिक इतिहास
प्रो. निर्मला यादव का ससुराल पक्ष और उरावर हाउस का इतिहास देश सेवा, सैन्य योगदान, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और राममंदिर आंदोलन से जुड़ा रहा है। प्रो. निर्मला यादव के ससुर स्वः सूर्य कुमार यादव भारतीय वायुसेना में स्क्वाड्रन लीडर के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। सेवानिवृत्ति के बाद वे आरएसएस में सक्रिय हुए और संघ के विभाग संचालक के दायित्व का निर्वहन किया।
प्रो. निर्मला यादव के पति स्व. हरेंद्र यादव बाबा ने वकालत की पढ़ाई पूरी की थी, परंतु कानून के पेशे के बजाय उन्होंने संघ की विचारधारा को चुना। वर्ष 1980 से 2002 तक आरएसएस में सक्रिय रहे हरेंद्र बाबा वर्ष 1992 के ऐतिहासिक राममंदिर आंदोलन के दौरान जेल भी गए थे। भाजपा ने उन्हें शिकोहाबाद नगर पालिका अध्यक्ष पद का टिकट दिया था, जिसे त्यागकर उन्होंने संगठन सेवा को प्राथमिकता दी थी। वर्ष 2021 में कासगंज के सोरों जी में रेलवे ट्रैक पर उनका शव मिलने से उनकी असमयिक और रहस्यमयी मृत्यु हो गई थी।
निर्मला यादव के जेठ स्व. योगेंद्र सिंह यादव अपने वायुसेना अधिकारी पिता से प्रेरित होकर संघ में आए और जिला संचालक तक रहे। वे आपातकाल के दौरान जेल गए थे और बाद में 1992 के अयोध्या आंदोलन के दौरान भी कारागार में बंद रहे। प्रो. निर्मला यादव की एक पुत्री श्वेता हैं, जिनका विवाह जोधपुर में हुआ है और उनके दामाद मुकेश कुमार वर्तमान में सीमा सुरक्षा बल में कमांडेंट के पद पर तैनात हैं।