फिरोजाबाद। उमस भरी गर्मी से सोमवार दोपहर में हुई बारिश के कारण लोगों को राहत मिली। देर शाम मौसम काफी ठंडा हो गया। तापमान में चार डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई। लोगों ने एसी, कूलर का प्रयोग करना भी बंद कर दिया है। मौसम वैज्ञानिक, के मुताबिक आगामी दिनों में बारिश और होगी। तापमान में गिरावट आएगी।
सोमवार सुबह से ही बादलों की आवाजाही जारी रही। दोपहर करीब एक बजे हल्की बारिश की शुरुआत हुई। इसके बाद तीन से पांच बजे के बीच तेज और रुक-रुक कर हल्की बारिश होती रही, जिससे मौसम पूरी तरह बदल गया।
शहर के कई इलाकों में बच्चे और युवा बारिश में भीगते नजर आए। बारिश के चलते अधिकतम तापमान 4 डिग्री गिरकर 31 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जबकि न्यूनतम तापमान 23 डिग्री रिकॉर्ड किया गया। शहर में कई स्थानों पर पानी भराव की स्थिति बनी, लेकिन लोगों के चेहरों पर राहत साफ झलकती रही। वहीं, फरिहा, नारखी और खैरगढ़ क्षेत्र में भी बारिश हुई। कृषि मौसम वैज्ञानिक डॉ. सुभाषचंद्र ने बताया कि अगले कुछ दिनों तक इसी तरह हल्की से मध्यम बारिश जारी रह सकती है। मंगलवार को अधिकतम तापमान 29 व न्यूनतम तापमान 21 डिग्री रहने की संभावना है।
टूंडला में तेज बारिश, जलभराव से परेशानी
टूंडला। बारिश के कारण टूंडला क्षेत्र में जलभराव हो गया। वहीं, किसानों के चेहरों में चिंता की लकीरें साफ दिखाई दीं। शाम को आई तेज बारिश के कारण फुटपाथ बाजारों में दुकानदार आनन-फानन में अपना सामान समेटने लगे, वहीं, करवा चौथ की खरीददारी के लिए निकली महिलाएं भी सुरक्षित ठिकानों की ओर भागे। अचानक हुई इस बारिश ने बाजारों की रौनक को कुछ समय के लिए फीका कर दिया। तेज बारिश के चलते टूंडला के निचले क्षेत्र सुभाष चौराहा, आगरा सर्विस रोड, शिवपुरी, नई आबादी, थाने के बगल टूंडली रोड आदि क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो गई, जिससे लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ा।
इधर, बाजरा व धान किसान वीरेश पाठक, सत्यप्रकाश बघेल, राजबहादुर हरेंद्र पाठक ने बताया कि इस समय उनकी खेतों में बाजरा व धान की फसलें कटी हुई पड़ी है। बारिश से खेतों पर पड़ी बाजरा में कंडू रोग व धान में पीलापन आ जाएगा। अगर और बारिश हुई तो वह खेतों में उग आएंगी। वहीं, आलू, सरसों के किसान पुष्पेंद्र उपाध्याय, विनोद दीक्षित, सुभाष कुमार, ब्रजवीर चौहान ने बताया कि आलू व सरसों की फसलों के लिए खेतों को तैयार कर दिया गया था। फसल बोई जाती उससे पूर्व ही बारिश हो गई। इससे अब खेतों को सूखने और फिर से जुताई कर खेत तैयार करने में समय लगेगा, जिससे ये फसलें और लेट हो जाएंगी।