पूरे महीने यातायात पुलिस और आला अधिकारी औपचारिकताएं पूरी करते रहे तो अभियानों का शेड्यूल कागजों में दम तोड़ गया। पूरे माह यातायात की व्यवस्थाएं ध्वस्त रही और शहर जाम के झाम से जूझता रहा।
नवंबर माह को यातायात माह के रुप में मनाया जाता है। इसके लिए एक तारीख को यातायात माह के आगाज के साथ पूरे महीने अभियान चलते हैं। कई अन्य आयोजनों के साथ लोगों को यातायात नियमों के प्रति जागरूक किया जाता है। यातायात पुलिस सबसे पहले आगाज माह का आरंभ भूल गई। अमर उजाला ने समाचार को प्रमुखता से प्रकाशित किया तो महकमे की निंद्रा टूटी । आनन फानन एसपी और डीएम की मौजूदगी में माह का शुभारंभ किया गया। लेकिन माह भर चले अभियानों की जमीनी हकीकत नजर नहीं आई। अभियान का शेड्यूल कागजों तक सिमट कर रह गया है। वाहनों की चेकिंग करके सिर्फ खानापूरी की गई। वाहनों का चालान भी कम ही हुए। वहीं दूसरी ओर जनपद में कई सड़क हादसे हुए। इसमें लगभग 25 से अधिक लोगों ने अपनी जान गंवाई। वहीं घायलों की संख्या एक सैकड़ा से अधिक तक पहुंच गई। इन हादसों की वजह देखें तो स्पष्ट है कि वाहन चालकों ने यातायात नियमों का पालन नहीं किया इससे दुर्घटनाएं हो रही हैं। लोगों को यातायात के नियमों की जानकारी के लिए पूरे माह गोष्ठी, निबंध प्रतियोगिताएं, प्रशिक्षण आदि कार्यक्रम आयोजित कराए जाने थे, जिनकी महज औपचारिकताएं निभाईं गईं।
यह था शेड्यूल
सुभाष तिराहा पर लोगों को ट्रैफिक लाइट के बारे में जागरूक करना।
हाईवे पर आटो का संचालन बंद कराना।
हाईवे के प्रमुख चौराहों से अवैध पार्किंग बंद कराना।
बाइक सवारों को हेलमेट का प्रयोग कराना।
खराब पड़े ट्रैफिक सिग्नल को ठीक कराना।
स्कूल कालेजों तक सीमित रही गोष्ठियां
हादसों को रोकने और लोगों को जागरूक करने के नाम पर विभागीय अधिकारियों ने चालकों को जागरूक करने का प्रयास तक नहीं किया। गांधी पार्क सहित अन्य स्थानों पर हर वर्ष चालकों के बीच गोष्ठियों का आयोजन कर उनको जागरुक किया जाता था। इस दौरान जिले के गणमान्य नागरिक भी मौजूद रहा करते थे, लेकिन इस बार न तो गोष्ठियां हुई और न ही चालकों को जागरूक करने का प्रयास किया गया। अभियान केवल स्कूल और कालेजों तक ही सीमित रह गया था।