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उत्तम क्षमा के साथ पर्यूषण महापर्व शुरू

Tue, 06 Sep 2016 11:36 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो फीरोजाबाद
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उत्तम क्षमा के साथ पर्यूषण महापर्व शुरू - फोटो : Amar Ujala
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जैन धर्म के दशलक्षण महापर्व का आगाज मंगलवार से हुआ। भोर से ही जिनभक्तों का सैलाब मंदिरों में उमड़ पड़ा। सामूहिक एवं संगीतमय पूजन किया गया और श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से जिनेंद्र भगवान को अर्घ्य चढ़ाए। सुबह, दोपहर और सायं जैन मंदिरों में धर्ममयी माहौल रहा। रात्रि में शास्त्र प्रवचन एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन धूमधाम से किया गया।
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उत्तम क्षमा पर्व से दशलक्षण पर्व की शुरुआत हुई। जैन समाज के लोगों ने पूजा अर्चना की। सुबह चार बजे से छदामीलाल जैन मंदिर में श्रद्धालुओं का आने का क्रम शुरू हो गया। देवदर्शन के बाद भक्ति भाव से संगीतमय पूजा की गई। आचार्य श्री विनम्र सागर महाराज ने उत्तम क्षमा के संबंध में प्रवचन दिए। दोपहर में तत्वार्थ सूत्र का वाचन किया गया। शाम को मुंबई से पधारे ब्रह्मचारी विकेश जैन प्रवचन ने उत्तम क्षमा पर प्रवचन दिए। सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं प्रतियोगिताएं आयोजित की गई।
इधर, बाहुबलि जिनालय, नई बस्ती में भक्तिभाव से पूजा अर्चना की गई। शाम को पांडेय राजेश प्रताप जैन ने प्रवचन दिए। चंद्रप्रभु मंदिर में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुजन पूजा-अर्चना के लिए पहुंचे। दोपहर में तत्वार्थ सूत्र के वाचन के बाद शाम को बनारस विश्वविद्यालय के डॉ. कमलेश कुमार जैन ने दसलक्षण के बारे में बताया। विभव नगर जैन मंदिर में पांडेय मुनींद्र कुमार प्रवचन दिए। नसिया जी मंदिर, अट्टावाला मंदिर, गली लोहियान आदि में श्रद्धालु भक्ति भाव से पूजा करने के लिए आए। कटरा मंदिर में सुबह पूजा अर्चना के बाद सायं को राजलक्ष्मी जैन ने शास्त्र प्रवचन दिए।
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एकासन एवं निर्जला व्रत रखे
दसलक्षण पर्व  के पहले दिन अधिकांश बच्चों, बुजुर्गों, महिला एवं पुरुषों ने व्रत रखे। किसी ने एकासन व्रत रखा तो कुछ ने अन्य, जल त्याग कर निर्जला व्रत रखा।

मंदिरों में सजावट
महापर्व पर सभी जैन मंदिरों में सजावट की गई है। मंदिरों के बाहर नगर निगम की ओर से कलई का छिड़काव एवं रंगोली सजवाई गई।

क्रोध कमजोर है, क्षमा शक्तिशाली- मुनि विन्रम सागर
श्री छदामी लाल जैन मंदिर में  मुनि महाराज ने दिए प्रवचन
अमर उजाला ब्यूरो
फीरोजाबाद। छदामीलाल जैन मंदिर में मुनि विनम्र सागर महाराज ने कहा कि क्रोध जीवन के लिए आग है। अंदरूनी जहर है। क्रोध माचिस की तीली की तरह है, जो स्वयं पहले जलती है और बाद में दूसरे को जलाती है। क्रोधी की आग में जलता व्यक्ति तन, मन और ज्ञान की शक्ति नष्ट कर लेता है। यही कारण है कि क्षमा करने वाले लोग ज्ञानी और ताकतवर होते हैं।
आचार्यश्री ने कहा कि क्षमा भाव ठंडे लोहे के समान और क्रोध गर्म लोहे के समान है। ठंडा लोहा हमेशा गर्म लोहे को पीटता है। उन्होंने कहा कि अहंकार और क्रोध सगे भाई है। क्रोध पुरुष की तरह है और क्षमा भाव सहनशील स्त्री की तरह। पुरुष-स्त्री की लड़ाई में पुरुष हारता है। मानसिक रूप स्त्री विजयी होती है। आचार्यश्री ने कहा कि क्रोध कमजोर है और क्षमा शक्तिशाली। क्रोध का निराकरण क्रोध नहीं है। क्रोध को क्षमा से ही नष्ट किया जा सकता है। क्षमा स्वयं संवेदन ज्ञान से अपने अंदर में प्रकट होती है। क्रोध एक छोटे से बिंदु से प्रारंभ होता है। क्रोध में 47 मांसपेशियों की शक्ति नष्ट होती हैं। कवहीं क्षमा में 19 पेशियों की शक्ति नष्ट होती है। क्रोध को क्षमा रूपी जल से शांत किया जा सकता है। हमें क्रोध से बचना चाहिए।

पीडी जैन कालेज में गोष्ठी का आयोजन
फीरोजाबाद (ब्यूरो)। पीडी जैन इंटर कालेज में पर्वराज पर्यूषण पर गोष्ठी का आयोजन किया गया। कालेज प्रधानाचार्य मुकेश शर्मा ने धर्म की गहन विवेचना की। उन्होंने बताया कि आत्मा से जन्म जन्मांतर का प्रदूषण हटाना ही पर्यूषण पर्व है। जीवन राग और द्वेष के भंवर में फंसकर संकल्प विकल्पों के जल में कैद हो जाता है। संचालन केके जैन ने किया। इस दौरान प्रवीन कुमार जैन, ललित जैन, दिलीप जैन, राशिद शेख, मंसूरी, आदि उपस्थित रहे।
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