सुहागनगरी रविवार को अहिंसा परमोधर्म: के संदेश से गूंज उठी। राज्य अतिथि का दर्जा प्राप्त जैन मुनि प्रमाण सागर एवं मुनि विराट सागर महाराज का मंगल प्रवेश गाजेबाजे के साथ हुआ। मुनिश्री के स्वागत के लिए सैकड़ों भक्त पहुंचे। जगह-जगह आरती उतारकर श्रद्धालुओं ने मुनिश्री से आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके बाद छदामीलाल जैन मंदिर में धर्मसभा हई। इस दौरान मुनिश्री की सुरक्षा में पुलिस फोर्स तैनात रहा।
पश्चिम बंगाल, विहार और झारखंड में धर्म प्रभावना करते हुए राज्य अतिथि मुनि प्रमाण सागर महाराज एवं विराट सागर महाराज का मंगल विहार 13 वर्ष बाद प्रदेश में हो रहा है। प्रात:काल सैकड़ों भक्त मुनिश्री की अगवानी करने डाकबंगला पहुंचे। मुनिश्री का मंगल प्रवेश होते हुए सुहागनगरी जयकारों से गूंज उठी। मुनिश्री संघ सदर बाजार होते हुए छदामीलाल जैन मंदिर पहुंचे। श्रद्धालुओं ने मुनिश्री आरती उतारकर और रंगोली बनाकर स्वागत किया। इस मौके पर आयोजित धर्मसभा में मुनिश्री ने कहा कि 1975 में दीक्षा गुरु आचार्य विद्यासागर महाराज पहली बार प्रदेश में पधारे थे। तभी उनका अंतिम वर्षायोग ऐतिहासिक प्रभावना के साथ हुआ। उन्होंने कहा कि यह नगरी पवित्र पुण्यभूमि है। यहां के लोगों में संतों को अपनी ओर आकर्षिक करने की एक चुंबकीय शक्ति है। उन्होंने कहा कि आपकी निष्काम प्रार्थना, निस्वार्थ परिश्रम एवं सच्ची श्रद्धा से ही भक्तों की इच्छा पूर्ति हो सकती है। सभा का शुभारंभ आगरा के उद्योगपति मदनलाल ने भगवान महावीर का चित्र अनावरण कर किया। पुष्पराज जैन ने दीप प्रज्ज्वलन किया। मुनिश्री की सुरक्षा पुलिस फोर्स के साथ पीएससी बल भी तैनात रहा। इस दौरान नरेंद्र प्रकाश जैन, अनूपचंद्र जैन, वीरेंद्र जैन, ललितेश जैन, अरुण जैन, विजय जैन देवता, वीरेंद्र कुमार, अजय जैन, प्रमोद कुमार आदि उपस्थित रहे।