गेहूं की कीमतों में बाजार में आए उछाल के कारण किसानों का रुख सीधे मंडियों की ओर हो गया है। सरकारी खरीद केंद्रों पर सन्नाटा है। विभागीय अधिकारी और स्टाफ खरीद का लक्ष्य पूरा करने के लिए किसानों पर दबाव बना रहे हैं। मंडी का भाव 1600 रुपये पहुंचने के कारण किसान किसी कीमत पर सरकारी केंद्र पर गेहूं बिक्री को तैयार नहीं है।
प्रदेश सरकार ने किसानों का गेहूं खरीदने को 1525 रुपये की दर निर्धारित की थी। जिले में 65 खरीद केंद्र स्थापित किए गए। शासन की ओर से 28 हजार एमटी गेहूं खरीदने का लक्ष्य भी तय कर दिया। शुरूआत में किसानों का रुख सरकारी गेहूं खरीद केंद्रों की ओर हुआ। तब गेहूं का बाजार में भाव 1490 से लेकर 1500 रुपये तक था। अब बाजार में अचानक आए उछाल के कारण किसानों का रुख सरकारी खरीद केंद्रों की जगह आढ़तियों के यहां हो गया है। वर्तमान में बाजार में गेहूं की डिमांड अधिक होने के कारण दर 1600 रुपये से लेकर 1625 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई है। सोमवार को कोटला रोड मंडी समिति में गेहूं का भाव 1600 रुपये रहा। यही कारण है कि खाद्य विभाग के केंद्र पर सन्नाटा दिखाई दिया। स्टाफ खाली हाथ बैठा रहा। नगला पानसहाय स्थित यूपी एग्रो के खरीद केंद्र बंद था।
मंडी में आए उछाल के कारण सरकारी गेहूं खरीद केंद्रों पर सन्नाटा है। एक दो ट्राली किसी से ले लें तो ठीक है नहीं तो खाली हाथ बैठे रहते हैं। अभी तक 8259.40 एमटी गेहूं की खरीद हुई। गेहूं खरीद का लक्ष्य पूरा होना मुश्किल है।
राघवेंद्र सिंह यादव, डिप्टी आरएमओ फीरोजाबाद।