फिरोजाबाद। राजकीय मेडिकल कॉलेज के सौ शैया अस्पताल में शुक्रवार को स्वास्थ्य सेवाओं की घोर संवेदनहीनता और लापरवाही सामने आई। प्रसव पीड़ा से तड़प रही एक गर्भवती महिला को समय पर डॉक्टरी मदद नहीं मिल सकी। इसके कारण उसने अस्पताल के मुख्य गेट पर ही बच्चे को जन्म दे दिया। इस हृदयविदारक घटना को देख अस्पताल परिसर में मौजूद तीमारदार भड़क गए और उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था को जमकर कोसा।
थाना रामगढ़ क्षेत्र के नाथ की बगीची निवासी खुशी को शुक्रवार दोपहर प्रसव पीड़ा हुई। परिजन सरकारी एंबुलेंस से सौ शैया लेकर पहुंचे। अस्पताल के मुख्य गेट पर जैसे ही साथ आई महिलाओं ने खुशी को एंबुलेंस से नीचे उतारा, उसे असहनीय प्रसव पीड़ा होने लगी और वह वहीं बैठ गई।
प्रसूता की हालत देख साथ आए परिजनों में अफरा-तफरी मच गई। आरोप है कि गेट पर मौजूद स्टाफ और सुरक्षाकर्मी सब कुछ देखते रहे, लेकिन किसी ने भी स्ट्रेचर या व्हीलचेयर उपलब्ध कराने की जहमत नहीं उठाई। परिजन और प्रसूता के साथ आई महिलाओं ने अंदर मौजूद महिला चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ को मदद के लिए कई बार आवाजें लगाईं, गुहार की, लेकिन अंदर से कोई बाहर नहीं आया।
जब स्थिति नियंत्रण से बाहर होने लगी, तो अस्पताल में मौजूद अन्य मरीज की महिला तीमारदारों ने प्रसूता के चारों तरफ कपड़ों का घेरा बना लिया। कुछ ही पलों में महिला ने अस्पताल के मुख्य प्रवेश द्वार पर ही बच्चे को जन्म दे दिया।
घटना के बाद जच्चा-बच्चा अस्पताल में भर्ती
मुख्य गेट पर प्रसव होने और परिसर में तीमारदारों का हंगामा बढ़ता देख अस्पताल प्रशासन में खलबली मच गई। इसके बाद आनन-फानन में स्टाफ बाहर दौड़ा और प्रसूता व नवजात शिशु को अस्पताल के भीतर ले जाकर भर्ती कराया गया। महिलाओं और तीमारदारों का कहना था कि यदि चिकित्सकों और स्टाफ ने थोड़ी भी तत्परता दिखाई होती, तो एक महिला को इस तरह खुले में प्रसव के लिए मजबूर नहीं होना पड़ता। इस मामले में तीमारदारों ने उच्चाधिकारियों से दोषी स्टाफ के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।