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आबादी के बीच डलाबघर, कैसे स्वच्छ हो शहर

Fri, 05 May 2017 11:26 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला फीरोजाबाद
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आबादी के बीच डलाबघर, कैसे स्वच्छ हो शहर - फोटो : अमर उजा‍ला
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केंद्र सरकार द्वारा स्वच्छ भारत अभियान के तहत शहरों को स्वच्छ बनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है, लेकिन बिना लैंडफिल साइड (डलाबघर) का निर्माण हुए शहर कैसे साफ होगा? स्वच्छता सर्वेक्षण की रैंकिंग में पिछड़ने में लैंडफिल साइड न होना मुख्य समस्या के रूप में सामने आया। शहर में आबादी के बीच कई स्थानों पर डलाबघर बना रखे हैं। यहां शहर का कूड़ा डाला जाता है।
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आठ लाख की आबादी वाली सुहागनगरी कोे नगर निगम लाख प्रयास भी स्वच्छ नहीं बना सके। शहर से प्रतिदिन निकलने वाले 500 मीट्रिक टन से अधिक कूड़े के निस्तारण को नगर निगम प्रशासन आजतक इंतजाम नहीं कर पाया है। कूड़े के निस्तारण का स्थायी निदान न होने के कारण घरों व दुकानों से निकलने वाला दिनभर सड़कों पर नजर आता है। शहर के मुख्य चौराहों से लेकर गली मोहल्लों में गंदगी के ढेर लगे रहते हैं। निगम कर्मचारी गली-मोहल्लों से जो कूड़ा उठाते भी हैं, उसे शहर में जगह-जगह बने खत्ताघरों पर डालकर इतिश्री कर लेते हैं।

10.72 करोड़ करने के बाद भी तैयार नहीं की डीपीआर
 पालिका बोर्ड में वर्ष 2009 में खत्ताघर निर्माण की पहल शुरू हुई। कुतकपुर चनौरा में खत्ताघर के लिए भूमि का चयन हुआ। शासन ने किसानों का मुआवजा राशि वितरित करने के लिए 10.72 करोड़ की धनराशि जारी कर दी है। बावजूद इसके नगर निगम प्रशासन अभीतक खत्ताघर निर्माण को डीपीआर तक तैयार नहीं करा सका।
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इन स्थानों पर डाला जाता है कूड़ा
हाईवे पर आसफाबाद-मौढ़ा के बीच में, नए बाईपास पर, रेलवे लाइन के सहारे, जलेसर रोड गोपाल आश्रम के पीछे, ओवरब्रिज के नीचे, शहर से सटी नई आबादी व 13 ग्रामसभाओं में जगह-जगह कर्मचारियों द्वारा खत्ता घर बना दिए गए हैं।

संसाधनों की कमी
शहर की सफाई व्यवस्था सुधारने में संसाधनों की कमी भी खल रही है। सफाई व्यवस्था के लिए 10 हजार की आबादी पर 28 कर्मचारियों का मानक है। शहर में आठ लाख की आबादी के हिसाब से सफाई कर्मचारियों की काफी कमी है। यहां करीब 2500 कर्मचारियों की और जरूरत है।

बोली जनता
जयवीर सिंह का कहना है कि यहां 35-40 साल खत्ता पड़ रहा है। कूड़ा न डालने के संबंध में नगर आयुक्त को कई बार शिकायत कर चुके हैं, परंतु कोई सुनवाई नहीं हुई।
अमित कुमार का कहना है कि सफाई कर्मचारी कूड़े के साथ मरे जानवर भी डाल जाते हैं, जिससे तीव्र दुर्गंध उठने के कारण दुकान पर बैठना मुश्किल हो जाता है।  
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प्रदीप कुमार का कहना है कि खत्ताघर से उठती तीव्र दुर्गंध के कारण ग्राहक भी दुकानों पर सामान खरीदने नहीं आते हैं।
सनी का कहना है कि नगर निगम द्वारा एक-दो दिन से मिट्टी डलवाई जा रही है। दिनभर धूल उड़ने के कारण दुकान पर नहीं बैठा जाता।
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