सुहागनगरी की फिजां में लगातार प्रदूषण का जहर घुलता जा रहा है। कांच उद्योग के साथ-साथ हाईवे पर दौड़ने वाले वाहन, धुआं उगलते जेनरेटर, सड़कों पर उड़ती धूल, व्यापक पैमाने पर पॉलीथिन का प्रयोग, अंधाधुंध पेड़ों की कटाई से पर्यावरण के साथ आम जीवन पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। सुहाग नगरी औद्योगिक क्षेत्र है। यहां क्लीन फ्यूल ग्रीन गैस से उद्योगों का संचालन हो रहा है। इसके बावजूद प्रदूषण का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है। बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए परंपरागत कांच उद्योग पर संकट के बादल मंडरा रहे है। सुहागनगरी में आरएसपीएम (श्वसनीय सूक्ष्म कण), जो सबसे खतरनाक प्रदूषण माना जाता है, का ग्राफ भी बढ़ रहा है। आरएसपीएम का मानक 60 माइक्रो ग्राम होना चाहिए, लेकिन वर्तमान में यह 250-300 माइक्रोग्राम तक है। वहीं विकास के लिए किए जा रहे प्रयास भी धरा की खूबसूरती को बिगाड़ रहे हैं। यहां पेड़ों का कटान भी बडे़ स्तर पर किया गया, जो वर्तमान में गिरते जलस्तर का प्रमुख कारण है। यही कारण है कि फीरोजाबाद के अधिकांश ब्लॉक डार्क जोन में पहुंच चुके हैं और यहां की जनता को पेयजल तक नसीब नहीं हो पा रहा है। पेड़ों का कटान ही धरती पर जल्दी-जल्दी भूकंप आने का भी प्रमुख कारण माना जा रहा है।
प्रदूषण के आंकड़े एक नजर में
मानक वर्तमान
आरएसपीएम 60 270
एसओ-टू 20 8
एनओ-टू 30 36
उद्योगों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए सभी इकाइयों में वायु प्रदूषण नियंत्रण डिवाइस स्थापित कराई जाएंगी। परिवेशीय वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए नीरी और एनजीटी के सुझावों पर अमल किया जाएगा। इसका असर आने वाले दिनों में नजर आएगा। दिखाई देगा।
डा. विश्वनाथ दुबे
प्रभारी क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
मात्र ढाई प्रतिशत भूमि पर रह गए वन
फीरोजाबाद (ब्यूरो)। प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी विनोद शंकर शुक्ला ने बताया कि वन क्षेत्र को बढ़ाने के लिए प्रतिवर्ष पहल की जा रही है। हालांकि जनसंख्या बढ़ने के साथ ही वन क्षेत्र का प्रतिशत घटा है। वर्तमान समय में जिले में 8037 हेक्टेयर में वन क्षेत्र रह गया है। उन्होंने बताया कि वन क्षेत्र जिले में कुल क्षेत्रफल का दो से ढाई प्रतिशत है, जो कम है।
प्रदूषण बढ़ा रहा टीबी के मरीज
फीरोजाबाद। गाड़ियों और चिमनियों से निकलता धुआं लोगों की सांस के साथ शरीर में प्रवेश कर जाता है। यह मानव के फेफड़ों के लिए नुकसानदायक है और टीबी का कारण बनता है। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. आरए अतेंद्र ने कहा कि फीरोजाबाद में टीबी रोगी बहुत हैं। यहां स्थिति पर काबू पाया गया है, लेकिन अभी मरीज हैं। सन् 2012 में 2375, सन् 2013 में 2210, सन् 2014 में 2433 और 2015 में 2329 टीबी के मरीज जिले में मिले। एक टीबी मरीज लोगों के बीच में रहकर 10 अन्य लोगों को टीबी का मरीज बना सकता है। स्लम अर्बन एरिया में टीबी रोगियों की संख्या अधिक है।
संगोष्ठी एवं पौधरोपण आज
फीरोजाबाद (ब्यूरो)। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर पांच जून को जनपद न्यायालय प्रांगण में जिला जज श्रीकृष्ण सिंह के आतिथ्य में प्रतीकात्मक पौधरोपण एवं गोष्ठी का आयोजन किया जाएगा। यह जानकारी डीएफओ विनोद शंकर शुक्ल ने दी।