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रक्षासूत्र बांध कर ली जायेगी पेड-पौधों के संरक्षण की शपथ

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फिरोजाबाद। इस बार का रक्षाबंधन पर शहर के पर्यावरण प्रेमी, चिकित्सक, शिक्षाविद एवं गणमान्य के अलावा सामाजिक संगठन के प्रतिनिधि पेड़-पौधों के संरक्षण की शपथ लेंगे। इसमें अमर उजाला फाउंडेशन की मुहिम को आगे बढ़ाने की पहल होगी। पर्यावरण प्रेमियों की माने तो पेड़-पौधों के संरक्षण को शुरू की गई मुहिम में आम जन को भी जोड़ा जाएगा।
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प्राणदायी ऑक्सीजन देने वाले पेड़-पौधों का संरक्षण जरूरी है। कार्बन डाई ऑक्साइड जैसी हानिकारक गैस का अवशोषण कर बदले में ऑक्सीजन देने वाले पेड़ों से अन्य भी कई लाभ मिलते हैं। इसके अलावा कई और अनगिनत फायदे पेड़-पौधों से प्राप्त होते हैं। इस बार रक्षाबंधन पर शहर के बुद्वजीवी, चिकित्सा, सामाजिक एवं शिक्षा से जुडे़ लोगों ने पेड़-पौधों के उचित रखरखाव एवं उनके संरक्षण का संकल्प व्यक्त किया है।
हमारा आने वाला कल पेड़-पौधों पर ही निर्भर करेगा। हम जिस तरह से अपने परिजनों की देखभाल करते हैं। ठीक उसी तरह पेड-पौधों की भी देखभाल करें, नहीं तो पर्यावरणीय असंतुलन हमारे जीवन पर भारी पडे़गा।
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अभिषेक मित्तल चंचल, उद्योगपति व पर्यावरण प्रेमी
नि:शुल्क ऑक्सीजन देने वाले पेड़ों को कटाना नहीं चाहिए। जरूरी होने पर पहले पांच पेड़ लगाए। तब एक पेड़ काटने के बारे में विचार करें। पेड़ नहीं होंगे तो आने वाले समय में लोगों का जीना दूभर हो जायेगा।
प्रवीन अग्रवाल पर्यावरण प्रेमी
शुद्ध व स्वच्छ पर्यावरण हमारे जीवन के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। शुद्व आक्सीजन के बगैर जीवन की कल्पना भी बेमानी है। लोगों को चाहिए कि वे हर पर्व व त्यौहारों पर पेड़-पौधों के संरक्षण की शपथ लें। प्राचीन पेड़ों को गोद लें और उनकी उचित देखभाल करें।
डॉ. पूनम, वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ
तीज-त्योहार पर भगवान की पूजा अर्चना के अलावा पेड़-पौधों के संरक्षण की भी शपथ लें। पीपल, बरगद, तुलसी, आम, अशोक आदि सैंकड़ों प्रजाति के पेड़ों की फूल-पत्तियों को पूजा-अर्चना में प्रयोग किया जाता है। जब हम पेड़ों के अंश को पूजा-पाठ में शामिल करते हैंतो फिर उनका संरक्षण भी हमारी जिम्मेदारी है।
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गोविंद वशिष्ठ, ज्योतिष शास्त्री, समाजसेवी
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