सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने बुधवार को प्रत्याशियों की सूची जारी कर दी है। इसमें जिले की पांच विधानसभा सीटों में से चार सीटों पर प्रत्याशी घोषित कर दिए गए हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि शिकोहाबाद सीट से उम्मीदवार घोषित नहीं किया गया, वहीं तमाम शिकवा-शिकायतों के बाद भी सदर सीट से अजीम भाई को फिर से टिकट दिया गया है। सिरसागंज और जसराना सीट से मौजूदा विधायकों पर ही दांव लगाया गया है।
टूंडला विधानसभा क्षेत्र से समाजवादी पार्टी महाराज सिंंह धनगर को पहले ही उम्मीदवार घोषित कर चुकी थी। वहीं, भाजपा से पूर्व सांसद प्रोफेसर एसपी सिंह बघेल की मजबूत दावेदारी सामने आने के बाद टूंडला पर बदलाव की चर्चा भी थी। सपा ने धनगर की उम्मीदवारी को बरकार रखते हुए कयासों पर विराम लगा दिया। जसराना सीट से मौजूदा विधायक रामवीर यादव को टिकट दिया जाना पहले से तय था। रामवीर यादव को सपा छठवीं बार चुनाव मैदान में उतार रही है। वह यहां से चार बार विधायक रह चुके हैं। सिरसागंज सीट पर मौजूदा विधायक हरिओम यादव की उम्मीदवारी भी तय थी। सपा मुखिया ने उन पर फिर से भरोसा जताते हुए दांव खेला है।
शिकोहाबाद सीट से मौजूदा विधायक ओमप्रकाश वर्मा का नाम बुधवार को जारी की गई सूची में नहीं है। पार्टी सूत्र बताते हैं कि शिकोहाबाद सीट पर अभी मंथन चल रहा है। क्षेत्र की यादव बेल्ट पर वर्मा को लेकर गहरी नाराजगी बड़ा कारण माना जा रहा है। ओमप्रकाश वर्मा को यूपी के कद्दावर नेता स्वर्गीय रघुवर दयाल वर्मा की राजनीतिक विरासत में शिकोहाबाद से इस कारण टिकट मिल गया था। 2012 के चुनाव के दौरान वर्मा का निधन हो गया था। वर्मा के प्रति क्षेत्र में सहानुभूति लहर को भुनाते हुए सपा ने रघुवर दयाल वर्मा के भतीजे ओमप्रकाश वर्मा पर दांव लगा दिया था। पांच साल विधायक रहते हुए वर्मा पार्टी के शीर्ष नेताओं से अधिक घुलमिल नहीं सके यह कारण भी उनकी उम्मीदवारी पर सस्सेंस बनाए हुए है। माना जा रहा है निषाद बेल्ट पर पार्टी यहां किसी नए चेहरे पर भी दांव खेल सकती है या फिर सैफई परिवार से जुड़ा कोई नेता यहां से चुनाव लड़ सकता है।
सदर सीट पर तमाम शिकवा-शिकायतों के बाद पूर्व विधायक अजीम भाई को सपा ने टिकट देने का फैसला लिया है। 2012 का चुनाव अजीम भाई ने सपा से लड़ा था और लगभग दो हजार वोटों के मामूली अंतर से हारे थे। लंबे समय से सपा में सक्रिय अजीम भाई पार्टी में तीन बार जिलाध्यक्ष भी रहे हैं। लोकसभा चुनाव में सपा के राष्ट्रीय महासचिव रामगोपाल यादव की नाराजगी के चलते जब उन्हें जिलाध्यक्ष पद से हटाया गया तब से उन्होंने पार्टी दूरी बना ली। अजीम भाई की पार्टी से दूरी के बाद सपा ने यहां से सबसे पहले घोषित किए गए उम्मीदवारों में टूंडला में महाराज सिंह धनगर के साथ सदर सीट से शमशाद बाबा को उम्मीदवार घोषित किया था लेकिन घोषणा के कुछ घंटे बाद ही उनका नाम वापस ले लिया।
अखिलेश यादव फ्रंट को लगा धक्का
अखिलेश यादव समाजवादी फ्रंट को मुलायम सिंह यादव की सूची गहरा धक्का दे गयी। फ्रंट के नेता सदर सीट और जसराना सीट पर चेहरा बदले जाने की उम्मीद कर रहे थे लेकिन मुलायम ने पुराने साथियों पर ही भरोसा जता कर टिकट देने की घोषणा कर दी। फ्रंट के संस्थापक अंशुल विक्रम सिंह ने कहा कि यदि इस सूची पर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और सपा के राष्ट्रीय महासचिव सांसद प्रोफेसर रामगोपाल यादव की सहमति है तब हम इन सभी प्रत्याशियों के लिए काम करेंगे। यदि सहमति नहीं है तो हम मुख्यमंत्री का जो भी आदेश होगा उसके अनुसार काम करेंगे।