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सेहत के लिए खतरा बन सकते हैं प्लास्टिक मिक्स कपड़े से बने मास्क

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फिरोजाबाद। कोरोना वायरस से बचाव के लिए मास्क का उपयोग करने की गाइडलाइन जारी हुई तो तेजी से डिमांड भी बढ़ी। जिन यूनिट में कॉटन के थ्री लेयर मास्क बनाए जाते थे, वो नाकाफी साबित होने लगे। ऐसे में बाजार में नए मास्क आ गए हैं। ये प्लास्टिक मिक्स नॉन वोवन कपड़े से बनाए जाते हैं। इस कपड़े का उपयोग पॉलीथिन बंद होने के बाद सामान लाने के लिए किया जाता था।
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हैरत की बात ये है कि ये मास्क मेडिकल अप्रूव हुए बिना ही बाजार में उतर गए। चिकित्सकों का कहना है कि प्लास्टिक मिक्स नॉन वोवन कपड़े से बने ये मास्क बिना मानकों को पूरा किए बन रहे हैं। इससे फायदा कम बल्कि सांस से जुड़ी बीमारियों का खतरा ज्यादा है। वहीं, कीमतों के नाम पर उपभोक्ताओं से मनमुताबिक दाम वसूले जा रहे हैं।
यह है फार्मूला
सर्जिकल मास्क बनाने के लिए नॉन वोवन फैब्रिक कपड़ा चाहिए। थ्री प्लाई सर्जिकल मास्क में से दो प्लाई इसी कपड़े के होते हैं। जबकि तीसरी प्लाई मेलब्रान फिल्टर की होती है। यह नॉन वोवन फैब्रिक से महंगा होता है। इससे इंफेक्शन का खतरा कम रहता है।
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चिकित्सक की राय
सेवार्थ संस्थान ट्रॉमा सेंटर के न्यूरोसर्जन डॉ. निमित गुप्ता ने बताया कि चिकित्सक भी कपड़े के बने थ्री लेयर मास्क का इस्तेमाल करते हैं। प्लास्टिक मिक्स कपड़े के मास्क से चेहरे को ही नुकसान होता है। इस मास्क को लगाने के बाद थोड़ी देर बाद ही घुटन होने लगती है। छोटे कण श्वांस के अंदर जाने पर नुकसान पहुंचाते हैं। लंबे समय मास्क लगाने पर झुर्री निकलती हैं।
- मास्क और थर्मामीटर की कालाबाजारी हमने नहीं होने दी है। प्लास्टिक मिक्स कपड़े के मास्क कहीं बिक रहे हैं तो उसके लिए निरीक्षण करेंगे। मास्क के थोक रेट नियंत्रित होने से फुटकर भाव भी गिरे हैं। - सुनील कुमार, ड्रग इंस्पेक्टर।
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