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अति प्राचीन एवं प्राचीन वृक्षों की धरोहर को सहेजने की तैयारी

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फिरोजाबाद। जिले में अति प्राचीन एवं प्राचीन वृक्ष रूपी धरोहरों को संरक्षित किया जाएगा। प्रदेश की विरासत अभियान के तहत लगभग सौ वर्ष प्राचीन हेरीटेज वृक्षों के चिह्नीकरण के लिए जिले में अभियान चलाया जाएगा। जिन प्राचीन वृक्षों को धरोहर के लिए संरक्षित किया जाना है। उनमें बरगद, पीपल, इमली, नीम, महुआ आदि के नाम शामिल हैं। खास बात यह है कि उक्त श्रेणी के वृक्षों की पहचान एवं जीवंतता सहेजने के लिए अभिलेखीय प्रपत्र भी तैयार होंगे।
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निकाय एवं ग्रामीण अंचलों में ऐतिहासिक, पौराणिक घटनाओं एवं धार्मिक मान्यता के अतिरिक्त पुरातनकाल में विशिष्ट व्यक्तिओं द्वारा रोपे गए प्राचीन एवं अति प्राचीन वृक्षों को संरक्षित किया जाएगा। गैर वन क्षेत्र के निकाय एवं ग्रामीण अंचलों में स्थित इन वृक्षों को संरक्षित करने के लिए संबंधित निकाय एवं पंचायत स्तरीय जैव विविधता प्रबंध समिति को जिम्मेदारी दी जाएगी। भारत सरकार के निर्देशानुसार फिलहाल इस पूरी कवायद के प्रथम चरण में जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों एवं निकाय प्रशासन के जिम्मेदारों से अति प्राचीन एवं प्राचीन वृक्षों की सूचनाएं प्राप्त करने का कार्य किया जा रहा है। सर्वे एवं सत्यापन के बाद अभिलेखीय प्रपत्र तैयार किए जाएंगे। जिन्हें भारत सरकार को भेजा जाएगा।
हेरीटेज वृक्ष निर्धारण की नियमावली
गैर वन क्षेत्र में हेरीटेज वृक्षों के चिह्नाकन के लिए निकाय क्षेत्र की जिम्मेदारी अहम होगी। जैव विविधता अधिनियम की धारा दो-जे के तहत संपादित होने वाली उक्त कवायद के अनुसार ग्राम व निकाय प्रशासन जिला प्रशासन के माध्यम से प्रभागीय वनाधिकारी को उपलब्ध कराई जाएगी। चिह्नित वृक्षों को विरासत वृक्ष घोषित कराने हेतु वनाधिकारी द्वारा इसकी संस्तुति सचिव उत्तर प्रदेश राज्य जैव विविधता बोर्ड लखनऊ को भेजा जाएगा।
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