परिजन का आरोप है कि डायलिसिस यूनिट के बाहर एक एंबुलेंस खड़ी थी। उन्होंने और यूनिट के स्टाफ ने एंबुलेंस चालक से कीर्ति को तुरंत इमरजेंसी तक छोड़ने की मिन्नतें कीं, लेकिन चालक ने यह कहकर इन्कार कर दिया कि उसके पास किसी अन्य मरीज के लिए कॉल आ चुकी है। जब कोई रास्ता नहीं बचा तो परिजन और अस्पताल कर्मी कीर्ति को स्ट्रेचर पर लिटाकर इमरजेंसी की तरफ तेजी से भागे लेकिन करीब 400 मीटर दूर स्थित इमरजेंसी पहुंचने से पहले कीर्ति बेदम हो गई। बाद में डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
मामा बोले- कानों की बाली भी कर ली चोरी
मामा जय प्रकाश ने आरोप लगाया कि रास्ते में कीर्ति के कानों से सोने की बाली भी चोरी कर ली गई, जिसकी कीमत करीब 50 हजार रुपये थी। उनके इस आरोप ने स्वास्थ्य विभाग में खलबली मचा दी है। उन्होंने कहा कि अगर समय से एंबुलेंस मिल जाती तो भांजी की जान बच सकती थी।
मरीज को जब अस्पताल लाया गया था, तब उसका बीपी 210 था। स्टाफ ने स्थिति को देखते हुए तुरंत डायलिसिस शुरू कर दी, लेकिन बीपी बढ़ता ही गया। 108 एंबुलेंस चालक को मानवता के नाते मरीज को तुरंत इमरजेंसी तक ले जाना चाहिए था। अंत में हमारे स्टाफ ने ही स्ट्रेचर से उसे इमरजेंसी पहुंचाया। इस पूरे मामले की गंभीरता से जांच कराई जा रही है और दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
-डॉ. नवीन जैन, सीएमएस
ये भी पढ़ें-
जनशिकायतों का फर्जी निस्तारण: सब रजिस्ट्रार का वेतन रोका, चार एसडीएम को नोटिस; डीएम ने की बड़ी कार्रवाई