फिरोजाबाद। यूपी बोर्ड परीक्षा परिणाम ने एक बार फिर सरकारी सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिले के 22 राजकीय इंटर कॉलेजों में से जिला टॉप-10 की सूची में किसी भी कॉलेज के छात्र को जगह नहीं मिल सकी है। जबकि 59 सहायता प्राप्त कॉलेजों में से चार कॉलेजों के बच्चे ही मेरिट में जगह बना सके हैं। शेष 55 वित्तविहीन विद्यालय हर बार की तरह इस बार भी फिसड्डी साबित रहे।
हाईस्कूल की मेरिट में तीन और और इंटर के जिला टॉप टेने की सूची में दो एडेड स्कूल का छात्र स्थान बना सका है। इसमें क्षेत्रीय इंटर कॉलेज सिरसागंज के हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट में टॉप टेन की सूची में शामिल हुए हैं। जिले में माध्यमिक शिक्षा विभाग की ओर से संचालित 22 राजकीय व 59 एडेड कॉलेजों की शैक्षिक व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए काफी प्रयास किए जाते हैं। इसके बाद भी मेरिट में सिर्फ क्षेत्रीय इंटर कॉलेज, एमडी जैन इंटर कॉलेज, एससीजीवी इंटर कॉलेज, लोक राष्ट्रीय इंटर कॉलेज के छात्र शामिल हैं।
ऐसे में अन्य सरकारी कॉलेजों पर सवाल खड़े हो रहे हैं। क्यों कि सरकार ने हाल में ही शिक्षकों की बंपर भर्ती कर कॉलेजों में तैनाती कर दी है। करोड़ों रुपये सरकार इन विद्यालयों में पर हर माह शिक्षकों के वेतन के रूप में खर्च कर रही है। हालांकि रिटायर्ड शिक्षकों का कहना है कि सबसे बड़ी समस्या, राजकीय स्कूलों में शिक्षकों की कमी को लेकर है।
-यूपी बोर्ड का परीक्षा परिणाम जारी हुआ है। कई नवाचार शुरू किए गए हैं। धीरे-धीरे उनका परिणाम सामने आएगा। फिलहाल, सरकारी कॉलेजों के परीक्षा परिणाम का अध्ययन किया जाएगा। हम समीक्षा करेंगे कि कहां विद्यालय में कमी रह गई।
निशा अस्थाना, डीआईओएस