टूंडला। प्रकृति की मार से किसान कराह उठा है। बरसात व ओलावृष्टि से रवि की फसल बर्बाद होने, आलू के धड़ाम होने के बाद अब बरसात न होने से किसानों की खरीफ की फसल भी बर्बाद होने के कगार पर है। बरसात के अभाव में किसानों की बाजरा व तिलहन की फसलें सूख रही हैं। पर्याप्त बिजली न मिलने किसान परेशान हैं।
बरसात न होने से किसानों की खेतों में खड़ी बाजरा, तिलहन आदि की फसलें सूखने के कगार पर हैं। तेज धूप खेतों में लहलहाती फसलों को झुलसा रही है। बाजरा, जोंडरी, खुत्ती, रमास, तिल, मूंग, उरद आदि की फसलें पीली पड़ती जा रही हैं। बरसात के अभाव में किसान फसलों की सिंचाई कर उन्हें बचाने के प्रयास में जुटे हैं, लेकिन नहरें, रजबहा सूखे पड़े हैं और बिजली की कटौती परेशानी का सबब बनी हुई है। किसान योगेश उपाध्याय, देवेंद्र तोमर, सुखवीर, अमर सिंह, का कहना है कि प्रकृति की लगातार पड़ रही मार से एक बार फिर किसान आत्महत्या के लिए मजबूर हो रहा है। पिछले वर्ष भी बरसात न होने से खरीफ की फसल को नुकसान हुआ था। इसके बाद आलू ने आंसू बहाने पर मजबूर कर दिया। किसी तरह किसान संभलता तो बरसात व ओलावृष्टि ने उम्मीदों पर पानी फेर दिया। अगर जल्द ही बरसात नहीं होती तो किसान एक बार फिर बर्बाद हो जाएगा।
किसानों को मिले 18-20 घंटे विद्युतापूर्ति
लाइनपार क्षेत्र के किसानों ने बिजली विभाग के विरुद्ध आक्रोश व्यक्त किया है। किसान योगेश उपाध्याय की 40 बीघा, लोकमन की 30, अयोध्या प्रसाद की 50, चंद्रपाल, वीरपाल की 25-25 बीघा, जगत सिंह की 20, रामगोपाल बघेल की 45, राजेंद्र प्रसाद की 10, रविशंकर की 20 बीघा बाजरा की फसल सूखने की कगार पर है। किसानों ने प्रदेश सरकार से फसलों को सूखे से बचाने के लिए 18 से 20 घंटे बिजली देने की मांग की है।