सुहागनगरी में एक ओर बढ़ते प्रदूषण के वास्तविक कारण जानने के लिए लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर अफसरों की नजरों के ठीक सामने कारखानों की चिमनियां धुआं उगल रही हैं। घंटों तक धधकने वाली भट्ठियों की चिमनियों से उठने वाले धुएं से पूरा आसमान काला पड़ रहा है।
टीटीजेड में बढ़ते प्रदूषण को लेकर फीरोजाबाद का परंपरागत कांच उद्योग तमाम मुसीबतें झेल रहा है। बड़े औद्योगिक समूहों द्वारा बढ़ते प्रदूषण, क्षमता विस्तारीकरण सहित मुद्दे पर एनजीटी, पर्यावरण मंत्रालय, संसदीय कमेटी में लगातार शिकायतें की जा रही हैं। इससे उद्यमियों के साथ अफसरों के सामने तमाम मुश्किलें हैं। ऐसे में टीटीजेड अथॉरिटी के निर्देश पर प्रदूषण के वास्तविक कारणों की जांच के नाम पर लाखों रुपये खर्च किए गए हं। वहीं दूसरी ओर सुहागनगरी में कुछ इकाईयों में चोरीछिपे पेट्रो कोक का प्रयोग किया जा रहा है। स्टेशन रोड पर स्थापित कांच इकाइयों में भट्ठी चालू करते समय पेट्रो कोक का प्रयोग किया जाता है। कोयला डालने पर कारखानों की चिमनियां घंटों तक धुआं उगलती रहती हैं। घंटों तक उठने वाले धुएं के कारण पूरा आसमान काला पड़ जाता है। ये सभी कारखाने भी जिला उद्योग केंद्र के ठीक सामने है। यहां सेे उद्योग विभाग के साथ अफसरों का अक्सर आवागमन रहता है। इसके बावजूद जिम्मेदार अफसर जानबूझ कर अनजान हैं। वहीं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भी संज्ञान लेना उचित नहीं समझा।
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1996 में कोयले के प्रयोग पर लगी थी रोक
वर्ष 1996 तक फीरोजाबाद में संचालित कांच उद्योग में कोयले का प्रयोग किया जाता था। हाईकोर्ट के निर्देश पर ताज संरक्षित क्षेत्र में कोयला, लकड़ी से चलने वाले उद्योग, जो धुआं उगलते हैं, पर रोक लगा दी गई थी। हाईकोर्ट के निर्देश के बाद 200 कांच इकाइयां गैस से संचालित हो रही हैं।
प्रदूषण के नाम पर सील कर दी गईं 111 पकाई भट्ठियां
सुहाग नगरी में घनी आबादी के बीच वर्षों से धुआं उगल रहीं करीब 111 पकाई भट्ठियां बढ़ते प्रदूषण के नाम पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने मुख्यालय के आदेश पर सील करा दी थी। 111 पकाई भट्ठियां एक साथ सील होने से हजारों श्रमिक बेरोजगार हो गए। कुछ भट्ठी स्वामियों ने प्रशासन से आश्वासन मिलने के बाद टीटीजेड से बाहर नए बाईपास पर लाखों रुपये खर्च कर सेटअप भी तैयार कर दिए लेकिन उन्हें आज तक गैस नहीं मिली।
प्रदूषण की जांच को नीरी को दिए 55 लाख
कांच उद्योग के खिलाफ प्रदूषण को लेकर आए दिन होने वाली शिकायतों पर विराम लगाने के लिए टीटीजेड अध्यक्ष के निर्देश पर जिला प्रशासन ने नागपुर की संस्था नीरी को प्रदूषण की जांच की जिम्मेदारी सौंपी। प्रदूषण की जांच को प्रशासन द्वारा 55 लाख रुपये भी दिए गए लेकिन महीनों बीतने के बाद भी प्रशासन को फाइल रिपोर्ट का इंतजार है।