जिले में कई पदों पर अधिकारी नहीं है
सुहागनगरी में विकास की रफ्तार थम गई हैं। जिले के कई बड़े विभागों में मुखिया की नामौजूदगी तरक्की मेें रोड़ा बनी हुई है। विकास को गति देने के लिए पिछले करीब एक वर्ष से सीडीओ के पद पर आईएएस अफसर के रूप में सुजीत कुमार मुस्तैद थे। उनका स्थानांतरण हुए करीब एक पखवाड़ा बीत गया लेकिन कोई नया अफसर तैनात नहीं किया गया। उनका कार्यभार पीडी डीआरडीए सर्वेशचंद्र यादव ने संभाला हुआ है। लेकिन सीडीओ कार्यालय का कामकाज संभालने से उनके कार्यालय का कामकाज पर भी असर पड़ रहा है।
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना महत्वपूर्ण योजना है। विगत वर्ष योजना के तहत 33 करोड़ से अधिक खर्च हुए लेकिन डीसी मनरेगा का पद छह माह से रिक्त पड़ा है। ऐसे में महत्वपूर्ण पद पर तैनाती नहीं होने से विकास की रफ्तार धीमी हो रही है। वहंी शिकोहाबाद ब्लाक में एपीओ का पद रिक्त है। ब्लाकों की बात करें तो फीरोजाबाद, मदनपुर एवं नारखी में कोई बीडीओ ही नहीं है। फीरोजाबाद का चार्ज हाथवंत के राजेश कुमार, मदनपुर का जसराना के साथ धर्मजीत सिंह एवं नारखी ब्लाक का चार्ज एका बीडीओ एके जौहरी संभाल रहे हैंद्घ वहीं पूर्ति विभाग में जिला पूर्ति अधिकारी राकेश कुमार जिले को तीन दिन का समय दे पाते हैं। सोमवार, बुधवार अज्ञैर शुक्रवार को वह आगरा डीएसओ का चार्ज संभालते हैं। पूर्ति निरीक्षक के आठ पद के सापेक्ष मात्र दो अधिकारी तैनात हैं। लिपिक के साथ ही चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भी मानक के अनुरूप नहीं हैं। ऐसे में खाद्य सुरक्षा योजना को भी जिले में पलीता लग रहा है।
सौ शैया का अस्पताल बना, परंतु महिला सीएमएस नहीं
करोड़ों की लागत से सौ शैया का महिला अस्पताल बनकर तैयार हो गया है। हालांकि महिला सीएमएस का पद रिक्त होने के कारण यहां भी परेशानी है। इस पद को कभी जिला अस्पताल के सीएमएस डा. अजय शुक्ला को संभालना पड़ता है तो कभी डा. एलके गुप्ता अथवा सीनियर महिला चिकित्सक को यह जिम्मेदारी उठानी पड़ती है।
खाकी के भी पद खाली
कानून व्यवस्था की कमान संभालने वाले खाकी के कई पद जिले में रिक्त हैं। हालांकि पिछले दिनों डीएसपी के रिक्त पदों को भरा गया। लेकिन सीओ ट्रैफिक और सीओ लाइन के पद रिक्त चल रहे हैं। ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के साथ लाइन की व्यवस्थाओं को संभालना काफी महत्वपूर्ण है।