फिरोजाबाद। जिले के सरकारी आयुर्वेद और यूनानी अस्पतालों में मरीजों को दवा बांटने के लिए स्टाफ नहीं है। 26 आयुर्वेद और दो यूनानी अस्पताल तीन फार्मासिस्टों के सहारे हैं। ऐसे में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी मरीजों को खुराक बांट रहे हैं। इन्होंने दवाओं की किताबें पढ़ी हैं न इलाज से कोई वास्ता रहा।
फार्मासिस्टों का मुख्य काम डॉक्टर की लिखी दवा की सही मात्रा मरीज तक पहुंचाना है। स्टॉक संभालने के साथ एक्सपायरी की निगरानी भी इनके जिम्मे है। इनकी कमी से कई अस्पतालों में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों (चपरासियों) से मरीजों को दवाएं बंटवाई जा रही हैं। इससे सही खुराक और दवा वितरण की गुणवत्ता पर असर पड़ रहा है। यह मरीजों के लिए बड़ी मुसीबत साबित हो सकता है।
होम्योपैथी विभाग को मिली थोड़ी राहत
होम्योपैथी अस्पतालों की स्थिति में कुछ सुधार हुआ है। आठ अस्पतालों में पहले तीन फार्मासिस्ट थे। बीते बुधवार को विभाग ने चार तैनाती कर दीं। जिला होम्योपैथी अधिकारी डॉ. जितेंद्र कुमार ने बताया कि नए फार्मासिस्टों ने कार्यभार ग्रहण कर लिया है। जल्द एक और तैनाती की उम्मीद है। इससे दवा वितरण व्यवस्था बेहतर होगी। वहीं, मेडिकल कॉलेज में 12 पद हैं। 11 फार्मासिस्ट कार्यरत हैं।