फिरोजाबाद। नवरात्र के पहले दिन आस्था और भक्ति का संगम दिखाई दिया। मंदिर कमेटी ने पहले से बता दिया था कि इस बार मंगला दर्शन नहीं होंगे। तब भी शहर के प्रमुख राज राजेश्वरी कैलादेवी मंदिर पर मंगला दर्शन के लिए तड़के तीन बजे से ही सैकड़ों लोगों की भीड़ एकत्रित हो गई। मंगला दर्शन के समय तड़के चार बजे तक भीड़ और बढ़ गई। मंदिर के पट सुबह छह बजे खोले जाने थे लेकिन भीड़ अधिक होने के कारण नहीं खोले गए। भीड़ कम होने पर सुबह आठ बजे मंदिर का गेट खोला गया।
रामलीला परिसर स्थित राज राजेश्वरी कैलादेवी मंदिर दर्शन के लिए सुबह आठ बजे से खोला गया। मुख्य गेट खोलने की बजाए मंदिर का छोटा गेट खोला गया। इसी गेट से श्रद्धालुओं की प्रवेश और निकासी हो रही थी। एक बार में 15 श्रद्धालुओं को मंदिर के अंदर प्रवेश दिया गया। मंदिर के अंदर प्रवेश करने के लिए श्रद्धालुओं के बीच धक्का मुक्की की स्थिति रही। मंदिर के अंदर की व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए।
महिला बोली ...
अंदर जाने दो, बच्चे को दर्शन कराने है
दोपहर 12 बजे मंदिर का गेट बंद कर दिया गया। सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु गेट के बाहर खड़े थे। इस बीच एक महिला बच्चे को गोद में लिए मंदिर के अंदर घुसने का प्रयास करने लगी। इसको सुरक्षाकर्मियों ने घुसने नहीं दिया। महिला ने सुरक्षाकर्मियों से कहा कि बच्चे का मुंडन करा लिया है। दर्शन कराने हैं। लेकिन सुरक्षाकर्मियों ने उसको अंदर नहीं जाने दिया।
पुलिस ने बांटे मास्क
कोरोना संक्रमण से बचाव हेतु पुलिस लगातार श्रद्धालुओं को जागरूक करने के साथ ही मास्क लगाने के लिए प्रेरित कर रही थी। श्रद्धालुओं को पुलिस द्वारा मास्क का वितरण किया गया।
पथवारी माता मंदिर पर रही श्रद्धालुओं की भीड़
कोटला रोड स्थित पथवारी माता मंदिर पर सुबह से ही पूजा अर्चना का दौर शुरू हो गया था। महिलाएं हाथ में जल का लौटा, पूजा की थाली लेकर पथवारी मंदिर पहुंचती रही। इस बीच सुरक्षा के लिए यहां न तो पुलिस तैनात दिखाई दी और न ही मंदिर समिति द्वारा सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कोई इंतजाम किए गए। पथवारी माता पर जल चढ़ाने के साथ ही महिलाएं सामूहिक रुप से मां के दर्शन करती नजर आई। पूजा अर्चना का दौर दोपहर करीब 12 बजे तक चलता रहा।
मां वैष्णोदेवी धाम मंदिर पर नहीं खोली गुफा
उसायनी स्थित वैष्णोदेवी धाम मंदिर के दर्शन करने के लिए श्रद्धालुओं का मंदिर पहुंचने का क्रम सुबह से ही जारी हो गया था। लोग पांच से छह किलो मीटर दूर से पैदल चलकर माता रानी के दर्शन के लिए मंदिर पहुंचे। लेकिन मंदिर गुफा में विराजमान मां के दर्शन की न तो अनुमति मिली और न ही मंदिर समिति द्वारा गुफा को दर्शन के लिए खोला गया। ऐसे में श्रद्धालु मंदिर परिसर में लगी मां दुर्गा के दर्शन करने के साथ ही प्रसाद आदि चढ़ाकर वापस लौटते दिखाई दिए।
भक्तों की बात
पूरी रात बेकार हो गई। दो बजे के जगे थे, नहा धोकर तीन बजे घर से निकले। पैदल चलकर मंदिर तक आए। इसके बाद भी मां के दर्शन नहीं हुए।
भामादेवी, निवासी हिमायुंपुर
रात एक बजे उठ गए थे। सोचा था कि जैसे ही पट खुलेंगे दर्शन हो जाएंगे। अब कुछ भी हो जाए दर्शन करके ही घर जाएंगे।
नीलम राठौर, निवासी कोटला चुंगी
सुबह सात बजे तक घर के सारे काम निपटा दिए। पूजा भी कर ली। सोचा था कि मंदिर पर भीड़ होगी तो देर हो जाएगी। लेकिन यहां आए तो पता चला कि दर्शन ही नहीं हो रहे।
साधना यादव , निवासी राजा का ताल
इस नवरात्र पर भी दर्शन के लिए गुफा नहीं खोली गई। प्रशासन को श्रद्धालुओं की आस्था को ध्यान में रखकर मंदिर खुलवाने चाहिए। जिससे पूजा अर्चना ठीक तरीके से की जा सके।
विद्यादेवी, निवासी राजा का बल