उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद में कूड़ा निस्तारण के लिए करीब 35 लाख रुपये की लागत से एमआरएफ (मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी) सेंटर बनाया गया है। लेकिन, यह सिर्फ कागजों में ही चल रहा है। कूड़ा इसके बाहर डाला जा रहा है। बड़े ढेर पर कूड़ा बाहर खुले पर सड़ रहा है।
कूड़ा निस्तारण प्लांट बनाते समय यह तय किया गया था कि सूखे कूड़े का प्रयोग ईंटें बनवाने में किया जाएगा। जबकि गीले कूड़े से खाद बनाई जाएगी। इन ईंटों का प्रयोग सरकारी निर्माण कार्य में किया जाना था। गीले कूड़े से बनने वाली खाद से जैविक खेती करने की योजना थी, लेकिन अभी तक प्लांट में कार्य शुरू नहीं किया गया। इस कारण कूड़े के ढेर खत्म होने का नाम नहीं ले रहे हैं।
वार्ड में सबसे बड़ी समस्या कूड़े की है। इस कारण गंदगी का अंबार रहता है। यदि कूड़ा निस्तारण हो जाए और लोगों को जागरूक किया जाए तो काफी हद तक शहर को सुंदर बनाया जा सकता है। -सौरभ कौशल
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