समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद अक्षय यादव समेत 34 कार्यकर्ताओं को फिरोजाबाद की एमपी-एमएलए कोर्ट ने कोविड प्रोटोकॉल उल्लंघन और निषेधाज्ञा के मामले में बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने सबूतों के अभाव और पुलिस के बयानों में विरोधाभास पाए जाने के बाद सभी आरोपियों को बृहस्पतिवार को बरी करने का आदेश जारी किया।
यह मामला 26 जून 2021 को जिला पंचायत (जिपं) चुनाव के नामांकन के दौरान दर्ज किया गया था। आरोप था कि सांसद अक्षय यादव और अन्य सपा कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट परिसर में निर्धारित सीमा से अधिक भीड़ जुटाकर महामारी अधिनियम और निषेधाज्ञा (धारा 144) का उल्लंघन किया। इस संबंध में थाना मटसैना में दरोगा कृपाल सिंह ने केस दर्ज कराया था।
केस में 61 लोगों को नामजद किया गया था और 150 से 200 को अज्ञात में दर्ज कराया था। विवेचक ने विवेचना के बाद अक्षय यादव, दिलीप यादव समेत 34 आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की थी।
एमपी-एमएलए कोर्ट में मुकदमे का ट्रायल हुआ। कोर्ट ने अभियोजन की ओर से पेश मुकदमे, साक्ष्यों, गवाहों के विश्लेषण में पुलिस की ओर से सबूतों का अभाव पाया। पुलिस टीम अपने आरोपों के समर्थन में कोई पुख्ता सबूत, जैसे फोटो या वीडियो, कोर्ट में पेश नहीं कर सकी।
कोर्ट ने बयानों को विरोधाभासी माना
दरोगा ने कोर्ट में कहा कि उन्होंने केस दोपहर 3:15 बजे दर्ज कराया। वहीं, मुकदमा लेखक ने अपने बयान में कहा कि तहरीर (शिकायत) दोपहर 2:30 बजे ही आ चुकी थी। कोर्ट ने इन विरोधाभासों को गंभीरता से लिया। बचाव पक्ष यह दलील देने में सफल रहा कि यह मुकदमा राजनीतिक दबाव से प्रेरित होकर सुनियोजित तरीके से दर्ज कराया गया था। इन कमियों को देखते हुए, एमपी-एमएलए कोर्ट ने सांसद अक्षय यादव और सभी 34 सपाइयों को दोषमुक्त करार देते हुए बरी कर दिया।