शहर में वायरल और संक्रामक रोगों की दस्तक, फॉगिंग भी साबित हो रही बेअसर
शहर में नगर निगम करीब लाखों रुपये फागिंग पर खर्च करता है। लेकिन मच्छरों पर दवा का असर नहीं हो रहा है। फागिंग भी हो रही है और शहर में मच्छरों का प्रकोप भी बढ़ रहा है। ऐसे में मच्छरों ने लोगों की नींद उड़ा दी है। मच्छरों के काटने से बीमार होने का खतरा बढ़ गया है। शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि मच्छरों से बचाव के लिए फागिंग अवश्य करवाई जाए, ताकि मच्छरों को खत्म किया जा सके।
शहर में जगह-जगह डेंगू, मलेरिया, चिकिनगुनिया सहित संक्रामक रोग दस्तक दे रहे हैं। अस्पताल में मरीजों की भरमार है। संक्रामक रोगों की रोकथाम के लिए नगर निगम द्वारा लाखों रुपये खर्च कर शहर के सभी वार्डों में रोस्टर के अनुसार एंटी लार्वा व फॉगिंग का छिड़काव कराया जा रहा है। नगर निगम के कर्मचारी सुबह-शाम फॉगिंग करने के लिए गली-मोहल्लों में दौड़ रहे हैं, लेकिन आम जनता को राहत मिलती नजर नहीं आ रही है। शहर में फॉगिंग व एंटी लार्वा की जिम्मेदारी सेनेटरी इंसपेक्टर व सुपरवाइजरों को सौंपी है। निगम कर्मचारी जिन क्षेत्रों में फागिंग व एंटी लार्वा कर रहे हैं, उस क्षेत्र के लोगों के हस्ताक्षर लेकर प्रतिदिन निगम को रिपोर्ट सौंपी जा रही है। स्टेशन रोड निवासी राजीव यादव का कहना है कि कुछ कर्मचारी फॉगिंग के लिए मशीन लेकर इधर-उधर घूमते नजर आए। कुछ जगह दवा छिड़क चले गए। करबला निवासी ओमप्रकाश का कहना है कि क्षेत्र में फॉगिंग जरूर हुई, लेकिन नालियाें में गंदगी जगह-जगह गंदगी के ढेर लगे रहने से मच्छरों का प्रकोप कम नहीं हुआ।
शहर में मच्छरों मारने के लिए नगर निगम द्वारा मैलाथियान दवा का छिड़काव किया जा रहा है, जो मच्छर में काफी असरकारक है। टेमीफाक्स 50 प्रतिशत ईसी एंटीलार्वा का छिड़काव भी कराया जा रहा है। पहले अपेक्षा हालात में काफी सुधार हुआ है।
- डा. प्रताप सिंह, नगर स्वास्थ्य अधिकारी
कल इन क्षेत्रों में हुई थी फॉगिंग
नगला विश्नू, लेबर कालोनी, आजाद नगर, मुश्ताक बिल्डिंग, कुआं वाली गली, भोजपुरा, कोटला रोड, स्टेशन, छारबाग, अंबेडकर पार्क, सैलई, बौधाश्रम, टापाकलां, लोहिया नगर, शीतल खां, देवनगर, हबीबगंज।
क्या बोली जनता
देवनगर निवासी कालीचरन ने बताया कि क्षेत्र में कर्मचारी कल फॉगिंग करने जरूर आए थे, लेकिन दवा छिड़काव के बाद भी मच्छर कम नहीं हुए।
कालीचरन का कहना है कि नगर निगम फॉगिंग के नाम पर खानापूर्ति कर रहा है। इसका कोई असर नहीं हो रहा है।