जिला महिला अस्पताल में बदइंतजामियों के चलते तीन नवजातों की मौत हो गई। घटना के बाद सत्ता के गलियारे में हड़कंप मचा तो कैबिनेट मंत्री के साथ इलाके के विधायक मंगलवार को पीड़ितों के घर पहुंचे। इसके बाद मंत्री जी और विधायकों ने महिला अस्पताल में भी निरीक्षण किया। इस दौरान पूरा स्वास्थ्य महकमा मंत्री के पीछे लग गया। डाक्टर मंत्री जी की हुजूरी में में लगे रहे और महिला अस्पताल के बालरोग विभाग में बच्चे इलाज के लिए तड़पते रहे। बच्चों को गोद में लिए तीमारदार परेशान थे लेकिन उनकी सुनने वाला कोई नहीं था।
तीसफ ुटा निवासी रेशमा छह माह की बच्ची को गोद में लिए सुबह नौ बजे से महिला अस्पताल में डाक्टर के कक्ष के बाहर बैठी थी। इंतजार कर रही थी कि कब डाक्टर साहब आएं और उसके बच्चे की नब्ज देखें। बच्ची उल्टी दस्त से परेशानी थी। दोपहर के 12 बजे चुके थे और बच्ची का इलाज शुरू नहीं हुआ था। इस समय कैबिनेट मंत्री प्रोफेसर एसपी सिंह बघेल महिला सीएमएस के कक्ष में थे और बच्चों का परीक्षण करने वाले डॉक्टर मंत्री जी के आगे-पीछे घूम रहे थे। स्टाफ नर्स अपने कक्ष में बैठी थी।
आसफाबाद निवासी रानी एक साल के भतीजे कबीर को लेकर नौ बजे से बैठी थी। इंतजार करते-करते सवा 12 बजे गए लेकिन बच्चे को इलाज शुरू नहीं हो सका। बच्चा बुखार सेे तप रहा था। रानी ने कहा क्या करें इतंजार कर रहे हैं सुबह के बैठे हैं पानी तक नहीं पिया है। मोहल्ला शीतल खां से एक साल के बच्चे को लेकर आई रेशमा ने कहा कि सुबह दस बजे से आए हैं एक बजने को आया अभी तक डाक्टर साहब नहीं आए हैं।
जसराना से सुरेंद्र सिंह और आसफाबाद से राजवीर अपने बच्चों को लेकर सुबह 10 बजे से आए थे लेकिन इलाज साढे़ 12 बजे तक इलाज नहीं मिला। ऐसे अनेक लोग थे जो बीमार बच्चों को गोद में लिए भटक रहे थे। किसी बच्चे को तेज बुखार था तो कोई बच्चा उल्टी-दस्त का शिकार था।
डाक्टर साहब कह गए हैं मंत्री के पास जा रहे हैं....
बीमार बच्चों को इलाज के लिए लाए लोगों ने ‘अमर उजाला’ को बताया हम तो सुबह के आए हैं और डाक्टर साहब यह कह कर चले गए अभी आते हैं मंत्री आए हैं उनके पास जा रहे हैं। तीमारदार रानी ने कहा कि बच्चों का इलाज जरूरी है अथवा मंत्री जी के साथ जाना..।
पहले बच्चों का इलाज होना चाहिए था...
तीमारदारों ने कहा कि नवजातों की मौत पर जांच करने मंत्री जी आए हैं। मंत्री जी को जानकारी देने के लिए सीएमओ और सीएमएस आदि अधिकारी हैं लेकिन डाक्टरों और अन्य स्टाफ मरीजों को छोड़कर मंत्री के पीछे नहीं लगना चाहिए।
कैबिनेट मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल ने मृतक बच्चों के घर गए थे। मामला एनआईसीयू का था। एनआईसीयू के नोडल अधिकारी डा. एलके गुप्ता हैं। इस कारण हम उन्हें ले गए। हालांकि हम पता करवाते हैं कि बाद में मरीज को देखा गया अथवा नहीं? हमने विधायक, मंत्री और उच्चस्तरीय अधिकारियों के समक्ष चिकित्सक कम होने की बात रख दी है। चिकित्सक आ जाएंगे तो दिक्कत नहीं होगी।
डा. साधना राठौर, सीएमएस, जिला महिला अस्पताल