पांच सौ और एक हजार का नोट बंद होने का कांच उद्योग पर पहले दिन ही बड़ा असर पड़ा है। लाखों श्रमिकों को बुधवार को भुगतान नहीं हो सका। गुरुवार को पैसा न मिलने की स्थिति में संभव है कई कारखानों में काम बंद हो जाए।
चूड़ी कारखाने से लेकर चूड़ी दुकान तक लाखों श्रमिक प्रतिदिन काम करता है और प्रतिदिन मजदूरों को मजदूरी मिलती है। एक कारखाने में एक दिन में औसत एक लाख रुपये से अधिक मजदूरों को बंट जाते हैं। कारखाना संचालकों के पास भुगतान के लिए पांच सौ और हजार के नोट ही अधिक होते हैं। प्रतिदिन बैंकों से लेनदेन होता है। पैसा बाजार से आता है वह भी हजार और पांच सौ के नोट में होता है। ऐसे में कारखाना संचालकों के सामने मजदूरों को छोटे नोटों से भुगतान की समस्या खड़ी हो गई। चूड़ी व्यापारी नीरज जैन का कहना है कि चूड़ी कारखाना संचालकों और गोदाम स्वामियों के बीच बड़े नोटों से लेनदेन तो हुआ लेकिन समस्या मजदूरों के भुगतान की थी। पल्लेदार, जुड़ाई करने वाले, छंटाई करने वाले श्रमिक बिना पैसा लिए घर गए।