मनरेगा में गड़बड़ी की जांच के लिए सीबीआई के बाद शासन ने पिछले चार वर्षों में खर्च की धनराशि का ब्योरा तलब किया है। अपर आयुक्त मनरेगा रणवीर प्रसाद का पत्र मिलने के बाद मनरेगा से जुड़े अफसरों ने ब्लाकों से सूचनाएं संकलित करना शुरू कर दिया है। सात जून तक ब्योरा लखनऊ भेजना है।
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना में धनराशि खर्च करने के साथ ही कुछ जिलों में खामियों के कारण ही शासन ने काफी गंभीरता से लिया है। शासन के अपर आयुक्त मनरेगा रणवीर प्रसाद ने प्रदेश के सभी सीडीओ एवं अपर जिला कार्यक्रम अधिकारी को आदेश जारी कर मनरेगा योजना की शुरुआत से लेकर चार वर्ष तक खर्च धनराशि का ब्योरा तलब किया है। विभागीय सूत्रों की मानें तो शासन ने वित्तीय वर्ष 2008-09, 2009-10 एवं 2010-11 तथा 2011-12, 2012-13 का ब्योरा मांगा है। बताते हैं शासन ने आरंभिक अवशेष धनराशि, मनरेगा योजना के तहत ही कुल केंद्रांश (केंद्र से प्राप्त धनराशि), कुल राज्यांश (राज्य से प्राप्त होने वाली धनराशि) तथा कुल व्यय धनराशि भी ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, कुल व्यय धनराशि एमआईएस की फीडिंग तथा एमपीआर की रिपोर्ट मांगी है।
शासन की ओर से मनरेगा योजना में खर्च धनराशि का चार वर्षों का ब्योरा तलब किया है। उन्होंने कहा कि सभी ब्लाकों, मनरेगा से जुड़े विभागों से ब्योरा मांगा है। इसे शासन को भेजा जाएगा।
रमेशचंद्र
अपर आयुक्त मनरेगा, फीरोजाबाद