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लॉकडाउन के कारण घरों को लौटे प्रवासी व कामगारों के चिहिंकरण का काम सुस्त, मजदूरों के सामने रोजी का संकट

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फिरोजाबाद। लॉकडाउन के कारण घरों को लौटे प्रवासी श्रमिकों का डाटा तैयार करने में पंचायत स्तरीय अधिकारी लापरवाही बरत रहे हैं। मनरेगा सेल द्वारा राजस्व विभाग एवं पंचायत राज विभाग से प्रवासी व कामगारों की संख्या मांगी जा है। जिला विकास अधिकारी राजेश कुरील ने इस पर नाराजगी जताई है। उन्होंने बुधवार को सभी नौ ब्लाकों के बीडीओ की मीटिंग बुलाई है। वर्तमान में तीन ब्लाकों की 12 पंचायतों ने लगभग 200 कामगारों की सूची मनरेगा सेल को सौंपी है।
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लॉकडाउन के कारण अपनी आजीविका खोने वाले प्रवासी व कामगार अपने घरों को वापस लौट रहे हैं। इन्हें उनके मूल निवास पर मनरेगा योजना के जरिये रोजगार के साधन उपलब्ध कराये जायेंगे। इसके लिए नौ ब्लाकों की 564 ग्राम पंचायतों मेें घर लौटे प्रवासी व कामगारों की सूची मांगी जा रही है। जिला प्रशासन की ओर से इस संबंध में मार्च में निर्देश जारी किये गये थे। लेकिन ब्लाक फिरोजाबाद, शिकोहाबाद एवं नारखी ब्लाकों से जुड़ीं 12 ग्राम पंचायतों ने ही सूचनायें उपलब्ध कराईं हैं।
जिला विकास अधिकारी ने बुलाई बीडीओ की बैठक-
प्रवासी श्रमिकों के चिह्निकरण और सूचनाओं के संकलन में ग्राम पंचायत स्तर पर बरती जा रही शिथिलता पर जिला विकास अधिकारी राजेश कुरील ने नाराजगी जताई है। प्रवासी व कामगारों के बारे सूचना संकलन में तेजी लाकर उन्हें रोजगार मुहैया कराने के लिए जरूरी कार्य योजना पर मंथन के लिये बुलाई गई बैठक में सभी नौ ब्लाकों के बीडीओ को भी उपस्थित रहने को कहा गया है।
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लॉकडाउन के चलते पथ विक्रेताओं पर पड़ रही दोहरी मार-
पीएम स्ट्रीट वेंडर्स स्वनिधि योजना के जरिये दस-दस हजार का ऋण लेने वाले पथ विक्रेताओं पर दोहरी मार पड़ रही है। लॉकडाउन के कारण अधिकांश पथ विक्रेता अपने ठेल-खोमचा व फड़ नहीं लगा पा रहे हैं। फड़ नहीं लगने के कारण पथ विक्रेताओं के समक्ष आजीविका का संकट भी उत्पन्न हो रहा है। वहीं दूसरी ओर गत कुछ माह पूर्व ली गई स्वनिधि संबंधी ऋण राशि के भुगतान को भी बैंकें पथ विक्रेताओं पर दबाव डाल रहीं हैं।
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