मंगलवार को एक फैक्टरी में खरीदारों के कलस्टर की ऑडिट टीम को आया देख प्रबंधकों ने 66 श्रमिकों को पैकिंग हाल में बंद कर गेट पर ताला दिया। दो घंटे तक श्रमिक बंद रहे, इसी बीच सूचना पर पहुंचे ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने ताला तुड़वाकर उन्हें मुक्त कराया। बाद में श्रम परिवर्तन अधिकारी ने श्रमिकों के बयान दर्ज किए।
ढोलपुरा स्थित एस गोपाल ओवरसीज में एक्सपोर्ट आइटमों की पैकिंग का कार्य होता है। मंगलवार को अचानक फैक्ट्री में नई दिल्ली से ऑडिट के लिए टीम के आने की सूचना फैक्ट्री प्रबंधकों को मिली। इसके बाद सुबह करीब दस बजे प्रबंधक व सुपरवाइजरों ने टीम के सामने श्रमिकों की संख्या कम दर्शाने के लिए 66 श्रमिकों को पैकिंग हाल में बंद कर बाहर से ताले लगा दिए। लगातार दो घंटे गर्मी के मौसम में बंद रहने से श्रमिक बेहाल हो गए और उन्होंने मोबाइल से इसकी सूचना श्रमिक नेता भूरी सिंह यादव को दी। भूरी सिंह की सूचना पर ज्वाइंट मजिस्ट्रेट रविंद्र कुमार मांदड़ व सहायक श्रमायुक्त राजेश मिश्रा ने फैक्टरी पहुंचकर श्रमिकों को मुक्त कराया। पैकिंग हाल से बाहर निकाले जाने के दौरान श्रमिक काफी घबराए हुए थे। श्रम प्रवर्तन अधिकारी एसपी पांडे ने सभी श्रमिकों के बयान दर्ज किए। श्रमिकों ने उन्हें बताया कि वे लोग 10-15 साल से कार्य कर रहे हैं। फैक्ट्री स्वामी उन्हें न्यूनतम मजदूरी का भुगतान भी नहीं कर रहा हैं।
इनको किया था बंद
बंद किए श्रमिकों में बंटू, पवन, रामसेवक, राजेश, हरीश, रामदास, शिवा, अनिल कुमार, ओशपाल, संजय, राहुल, राकेश, धर्मसिंह, बबलू, चंद्रसेन, लखमीचंद्र, दिनेश, भुवनेश, दुर्गेश, नितिन जैन, अमित पाठक, प्रमोद राठौर, जितेंद्र, श्रीकृष्ण, शिवम दुबे, दयाराम, उपदेश, कृष्णमोहन, अवधेश, पंकज, सुरेशचंद्र, प्रमोद, सुनील, अनिल, राकेश, सुरेंद्र, राजेश, मानप्रताप, कुमार राठौर, सुंदर, चंद्रभान, मनीष, महीपाल, इंद्रजीत, अमित राठौर, जयवीर, लक्ष्मीनरायण, हरीसिंह, प्रेमचंद्र, भूरीसिंह, बॉबी, विनोद, शिवशंकर, संतोष कुमार, कुलदीप, राजा, सत्यप्रकाश, राहुल कुमार, अवनीश, मुकेश कुमार, ज्ञानेंद्र, ब्रजेश कुमार, दिनेश राठौर, अवनेश राठौर, पुरुषोत्तम, पुष्पेंद्र कुमार आदि शामिल है।
श्रमिकों के संबंध में नहीं मिला रिकार्ड
ज्वाइंट मजिस्ट्रेट व एएलसी ने फैक्ट्री में तैनात श्रमिकों के संबंध में रिकार्ड मांगा तो वहां मौजूद मैनेजर सोनी शर्मा, अनिल बाबू व राघवेंद्र सुपरवाइजर ने पहले तो उन्हें गुमराह करने का प्रयास किया। सख्ती से पूछताछ करने पर बताया कि फैक्ट्री स्वामी अतुल अग्रवाल नोएडा में हैं, वहीं ये जानकारी दे सकते है। पूछताछ के दौरान फैक्ट्री में श्रमिकों से संबंधित स्टेंडिंग आर्डर, फार्म, श्रमिकों के हस्ताक्षर युक्त वेतन का रिकार्ड नहीं मिला। पूछताछ के दौरान यह भी संज्ञान में आया कि पूरी फैक्ट्री में कोई स्थाई श्रमिक तैनात नहीं था।
अफसरों की सख्ती देख खिसक लिए ऑडिट अधिकारी
नई दिल्ली की यू.एल. इंडिया प्राइवेट कंपनी से सोशल ऑडिट के लिए पंकज कुमार पहुंचे थे। श्रमिकों को बंधक बनाने का मामला सामने आने और अफसरों की सख्ती देख आडिट टीम भी मौके से भाग खड़ी हुई।