फिरोजाबाद। अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या सप्तम जितेंद्र गुप्ता ने 49 वर्ष पुराने रामबेटी की हत्या के मामले में महेंद्र सिंह को आजीवन कारावास एवं 20 हजार रुपये अर्थदंड की सजा से दंडित किया। अर्थदंड अदा न करने पर एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भोगना होगा। मामला थाना नारखी हाल थाना उत्तर क्षेत्र टापा खुर्द का है। इसी क्षेत्र की मीरा देवी गजराज सिंह ठाकुर ने रिपोर्ट दर्ज कराते हुए कहा कि 14 सितंबर 1974 को शाम 5 बजे शाम उसी के गांव के महेंद्र सिंह व राम मूर्ति पत्नी राजेंद्र सिंह ने उसकी मां की गोली मार कर हत्या कर दी। घटना का कारण राजेंद्र सिंह का मृतका के घर आना जाना उसकी पत्नी राम मूर्ति को अच्छा नहीं लगता था और शक करती थी। इसीलिए राममूर्ति ने अपने पति की लाइसेंसी बंदूक से उस समय गोली मार दी। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना प्रारंभ की। लेकिन महेंद्र सिंह पुलिस की गिरफ्त से बचता रहा।
दोषसिद्व महेंद्र सिंह अपने पिता का नाम पन्ना लाल के स्थान पर गोपी चंद्र के नाम से सभी आईडी प्रूफ तैयार कराकर न्यायालय में अपने को अन्य व्यक्ति होने का दावा करता रहा और इसकी कार्रवाई उच्च न्यायालय में भी करके 37 वर्ष तक उच्च न्यायालय के स्थगन आदेश से बचता रहा। आखिर में उच्च न्यायालय ने तथ्यों एवं साक्ष्य के आधार पर महेंद्र सिंह की याचिका खारिज कर दी। अंत में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट फिरोजाबाद की न्यायालय से गिरफ्तारी वारंट जारी होने के बाद पुलिस ने 04 अप्रैल 2022 को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया।
मुकदमा सेशन सुपुर्द होकर अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट नंबर 7 जितेंद्र गुप्ता की न्यायालय भेजा गया। शासन की ओर से पैरवी सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता श्रीनिवास सक्सेना ने केस को साबित करने के लिए दलीलें दीं। न्यायाधीश जितेंद्र गुप्ता ने महेंद्र सिंह को राम बेटी की हत्या का दोषी पाते हुए आजीवन कारावास एवं अर्थदंड की सजा सुनाई।