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सुविधाओं का अभाव, उद्यमी परेशान

Mon, 17 Aug 2015 11:06 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला फीरोजाबाद
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शिकोहाबाद। शिकोहाबाद में यूं तो कई औद्योगिक आस्थान हैं। कई फैक्ट्रियां भी संचालित होती हैं लेकिन सुविधाओं के अभाव में तरक्की पर ब्रेक लगा हुआ है। हालात यह हैं कि उद्यमी इकाइयां को दूसरी जगह लगाने पर मजबूर हैं।
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हाइवे के किनारे रामलीला मैदान के सामने स्थित इंडस्ट्रियल एरिया की स्थापना 1984 में हुई लेकिन जलभराव, गंदगी, टूटी सड़कें, शोपीस बनी पानी की टंकी, बदहाल पार्क अब इसकी पहचान बन चुका है। टीटी जोन के बाहर स्थित होने के बावजूद यहां सुविधाओं के नाम पर कुछ नहीं मिला। हालात यह हैं कि उद्यमी उद्योग धंधों को दूसरी जगह स्थापित करना चाह रहे हैं। विकास या सौंदर्यीकरण की बात तो दूर, स्वीकृत हुई धनराशि को आने में ही पांच वर्ष लग गए। सरकारी नीतियों के चलते आठ माह बीतने पर अब बारिश में विकास के काम शुरू कराए गए। करीब छोटी बड़ी 50 इकाइयां संचालित हो रहीं है। इनमें साबुन, फर्टिलाइजर, चाय, सीमेंट पाइप, केमिकल्स की फैक्ट्रियां भी शामिल हैं। वर्तमान में अधिकतर इकाइयां की हालत दयनीय है। जबकि कई लोग फैक्ट्री बंद कर बिकाऊ का बोर्ड लगा चुके हैं। यहां कार्यरत इकाइयों के स्वामियों द्वारा उद्योग बंधु की बैठकों में सुरक्षा के लिए पुलिस चौकी की स्थापना की मांग की गई लेकिन गश्त को सिपाही तक नहीं मिले। दस वर्षों में जल निकासी का कोई इंतजाम नहीं हो सका। पार्क की बाउंड्रीवाल टूट गई। अब वह डलाबघर के रूप ले चुका है। हाइवे फोर लेन के निर्माण के दौरान अफसरों ने उद्यमियों को नहीं बताया कि सड़क ऊंची हो जाएगी। अब मुख्य मार्ग ढाई मीटर ही चौड़ा रह गया। ट्रक तक नहीं जा सकते। कोई कट न होने से वाहन मुड़ भी नहीं पाते। जो नाले बनाए थे उन पर अतिक्रमण कर लोगों ने बंद कर दिया है। इससे जलनिकासी की समस्या है। इस संबंध में डीएम को भी अवगत कराया लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई है।

इंडस्ट्रियल एरिया के विकास के लिए 3.86 करोड़ रुपये स्वीकृत हुआ है। वह भी पांच वर्ष के बाद। पहली किश्त के रूप में 50 लाख रुपये आया है। अधिकारियों का अंकुश न होने के कारण धन के आने के आठ माह बाद भी कार्य युद्ध स्तर पर शुरू नहीं कराए गए। जलभराव की समस्या है। उद्योग बंधु की बैठक में मामले को उठाया, नतीजा तो ढाक के तीन पात ही रहा।
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राजीव अग्रवाल, अध्यक्ष औद्योगिक आस्थान, शिकोहाबाद।

शिकोहाबाद में 1984 में इंडस्ट्रियल एरिया की स्थापना होने के साथ लगा था कि औद्योगिक क्षेत्र का हब यहां की नगरी बनेगी। लेकिन बदहाली का यही हाल रहा तो जो इकाइयां चल रहीं हैं वह भी पलायन को बाध्य होंगी।
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गोविंद प्रसाद अग्रवाल, उद्यमी
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