भाषा का जितना सहल और सरल प्रयोग करेंगे, वाक्य समझने योग्य बनेंगे। एक सफल लेखक की कुंजी वही है जब पाठक शुरू से लेकर अंत तक उसके लिखे को पढ़ने पर मजबूर हो जाए। ज्ञान गंगा मिशन के तत्वावधान में आयोजित कार्यशाला में युवाओं को लेखन कला तकनीकी के सूत्र बताए गए। पहले चरण में कई वर्गों में लेखनी को बांटकर अभ्यर्थियों को समझाया गया।
दूसरे चरण में परीक्षा के बाद उत्तीर्ण अभ्यर्थियों को पुरस्कृत किया। गौरीशंकर इंटर कालेज में आयोजित ‘एक दिन में लेखक बनें’ कार्यक्रम में सैकड़ों युवाओं ने भाग लिया। कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि डॉ रामस्नेहीलाल शर्मा यायावर द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर की गई। विधायक मनीष असीजा ने पुष्पार्जन किया। तदुपरांत कुंज बिहारीदास की कृति ‘हमारे पूर्वज हमारा परिवार’ का विमोचन डॉ रामस्नेहीलाल, शिवनारायन शास्त्री, राकेशबाबू तिवारी, मनोज कुमार, विजयपाल सिंह द्वारा किया गया। इस मौके पर डॉ यायावर ने सहभागियों को बताया कि लेखक बनने के लिए भाषा का ज्ञान होना अति आवश्यक है। मोबाइल व इंटरनेट पर जिस तरह की भाषा प्रयुक्त होती है, वह लेखन के लिए उपयुक्त नहीं है।
राकेश बाबू ने बताया कि हमारी हिंदी भाषा की वर्णमाला विशुद्ध वैज्ञानिक है। उसे सूक्ष्म ढंग से सीखने के बाद ही लेखक बनेंगे। कुंज बिहारी ने लेखन कला के तकनीकी सूत्र बताए। यात्रा वृतांत लेखन, संस्मरण लेखन और घटना चित्रण की विस्तार से जानकारी दी। इस दौरान आयोजित परीक्षा में पहला स्थान मनोज कुशवाह, दूसरा स्थान पूजा शंखवार, तीसरा स्थान जागृति पचौरी और चौथा स्थान वास भारद्वाज ने प्राप्त किया। इस मौके पर मोहित शर्मा, गौरव भारद्वाज, नरेंद्र वशिष्ठ, दिनेश भारद्वाज, दिलीप कुमार, दीपक, रजनी देवी आदि उपस्थित रहे।
लेखक बनने के टिप्स
- भाषा का पूर्ण ज्ञान होना बहुत जरूरी है
- मोबाइल और इंटरनेट की भाषा नहीं पर्याप्त
- अधिक जटिल भाषा के प्रयोग से आती नीरसता
- हिंदी भाषा की वर्णमाला का आधार वैज्ञानिक