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खर्चीला हुआ बस्ता, अभिभावकों की हालत खस्ता

Mon, 04 Apr 2016 11:02 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला फीरोजाबाद
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नए सत्र के लिए किताबें खरीदते अभिभावक
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 महंगाई के चलते इस बार बच्चों का बस्ता और खर्चीला हो गया है। अभिभावकों को करीब 15 फीसदी तक ज्यादा खर्च करना पड़ रहा है। स्कूल बैग से लेकर ज्योमेट्री बॉक्स तक के दाम बढ़े हैं। प्राइवेट स्कूलों की मनमानी से अभिभावक परेशान हैं। कमीशन के लिए पुस्तक और यूनिफॉर्म विक्रेता भी सेट कर लिए गए हैं।
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नया शिक्षा सत्र अभिभावकों के लिए मुसीबत लेकर आया है। स्कूलों ने फीस बढ़ाने के साथ कोर्स भी बढ़ा दिया। कमीशन के चलते एनसीईआरटी की पुस्तकें कोर्स से गायब कर दीं। हालत यह है कि किताबों की खरीद के लिए सूची की जगह दुकान का नाम बताया जा रहा है। पिछले वर्ष शासन के आदेश के बाद कि स्कूल परिसर में किताब-कॉपी की बिक्री न की जाए, स्कूलों ने अपनी दुकान अब बाजार में खोल ली। बाकायदा कहा जाता है कि वह फलां दुकान जाकर स्कूल व कक्षा का नाम बताएं, उन्हें किताबें मिल जाएंगी, लेकिन वहां पहुंचने पर दुकानदार मनमानी कीमत वसूलते हैं। 
प्री नर्सरी की किताब के लिए सात से आठ सौ रुपये तक लिए जा रहे हैं। कक्षा एक से आठ तक की किताबों व कॉपियों के लिए एक हजार से 3000 रुपये तक देने पड़ रहे हैं। पुस्तक विक्रेता सौरभ ने बताया कि पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष किताबों की कीमत में दस से पंद्रह फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।
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प्रशासन नहीं कर रहा सुनवाई
स्कूलों और पुस्तक विक्रेताओं की मनमानी से अभिभावकों की परेशानी बढ़ी हुई है। अब तक जिला प्रशासन ने स्कूलों की मनमानी पर शिकंजा कसने को कोई प्रयास नहीं किए हैं। मजबूर अभिभावक मनमाने दामों और स्कूल द्वारा निर्धारित दुकान पर ठगने को मजबूर हैं। 


’स्कूल बैग- 100 से 800 रुपये’
कलर- 10 से 100 रुपये’
ज्योमेट्री बाक्स- 10 से 100 रुपये
थर्मस- 100 से 300 रुपये’
टिफिन- 50 से 200 रुपये

स्कूलों की कमीशनखोरी के प्रकरण में कोई शिकायत तो नहीं मिली है। अगर ऐसा है, तो अभिभावक शिक्षा विभाग को शिकायत दें, स्कूल के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। 
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रविंद्र सिंह, जिला विद्यालय निरीक्षक
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