कारगिल शहीद सतीश बघेल की प्रतिमा।
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फिरोजाबाद। जिस मिट्टी में खेल कर देश सेवा का जुनून आया। देश की रक्षा की खातिर कारगिल की लड़ाई में वीर जवानों ने अपने प्राण न्योछावर कर दिए थे। उन शहीदों के गांव को भी प्रशासन भूल गया। कारगिल शहीदों के गांवों में न तो विकास पहुंचा और न हीं जर्जर रास्ते बनवाए गए। कोई भी ऐसा कार्य नहीं किया गया जो शहीद के नाम से पहचान हो सके। यहां तक कि कारगिल विजय दिवस पर भी प्रशासन शहीदों के गांवों की ओर नहीं देखता।
एका। शहीद हेम सिंह निवासी नगला खेड़ा 1999 युद्ध के दौरान पैरा कमांडो ग्रुप में कारगिल पर शहीद हो गए थे। प्रशासन ने हेम सिंह के परिवार जो वादे किए आज तक पूरे नहीं हो सके हैं। सड़क भी जर्जर पड़ी हुई है। शहीद के भाई सुघर सिंह ने बताया कि रोड पर शहीद के नाम गेट लगाने के लिए वादा किया गया था। एका -वसुंधरा रोड शहीद के नाम पर नहीं रखा गया। शहीद के गांव की लिंक रोड करीब 500 मीटर की है। उसकी मरम्मत आज तक नहीं हुई। बरसात में जलभराव हो जाता है। सुघर सिंह ने बताया कि स्मृति स्थल पर हैंडपंप भी नहीं लगा है। उन्होंने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि गणतंत्र दिवस हो या स्वतंत्रता दिवस मौके पर हमारे द्वारा शहीद स्मृति चिह्न पर ही झंडा फहरा दिया जाता है, लेकिन प्रशासन का कोई भी अधिकारी नहीं आता है।
फरिहा। कारगिल शहीद सतीश बघेल ने भी अपने प्राण देश रक्षा के लिए न्योछावर कर दिए थे। मगर प्रशासन ने उनके बलिदान को भी आसानी से भुला दिया। शहीद के गांव मरसलगंज भी विकास से अछूता रह गया है। मरसलगंज गांव के अधिकांश हिस्से में खरंजा नहीं हुआ है। गांव का अधिकांश रास्ता ऊबड़-खाबड़ बना हुआ है, जो बारिश के दिनों में समस्या खड़ी कर देता है। जबकि गांव की आबादी एक हजार से अधिक है। स्ट्रीट लाइट भी नहीं लगी है। रात में अंधेरा छा जाता है। क्षेत्रीय निवासी अजय कुमार ने बताया कि शहीद के गांव में विकास तो दूर, सफाई व्यवस्था भी नहीं रहती है। सफाईकर्मचारी भी नियमित नहीं आता है।
कारगिल शहीद हेमसिंह।- फोटो : FIROZABAD