फिरोजाबाद। सिंचाई विभाग के बाद अब जल निगम से प्रमुख सचिव नगर विकास ने पांच साल के मेंटीनेंस के खर्चे का हिसाब मांगा है। शासन से मिले निर्देश के बाद जल निगम अधिकारियों ने इस्टीमेट बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। ताकि मेंटीनेस के लिए समय से पैसा मिलता रहे।
जेड़ाझाल परियोजना के तहत शहर को गंगाजल उपलब्ध कराने के लिए जहां सरकार द्वारा 432 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। वहीं सिंचाई विभाग द्वारा 190 करोड़ रुपये से नंदपुर इंटेक प्लांट तक पानी पहुंचाने के लिए झालगोपालपुर नहर का निर्माण कराया गया था। इसके चलते शहर को गंगाजल की सप्लाई मिलना शुरू हो गई है। अब मेंटीनेंस पर हर वर्ष खर्च की जाने वाली धनराशि का हिसाब प्रदेश सरकार द्वारा जल निगम से मांगा गया है कि इस योजना के मेंटीनेंस पर हर पांच साल में कितने रुपये की जरुरत पड़ेगी। एक्सईएन जल निगम राकेश कुमार ने बताया कि यह प्रस्ताव फरवरी माह के अंत तक प्रदेश सरकार को भेज दिया जाएगा।
इन चीजों का होना है मेंटीनेंस
नंदपुर इंटेक प्लांट, सैलई स्थित डब्लूटीपी प्लांट, जेड़ाझाल परियोजना के अंतर्गत डाली गई पाइप लाइन, टैंक पानी साफ करने के लिए क्लोरिन व अन्य केमिकल व कर्मचारियों के वेतन पर खर्च होने वाले रुपये का हिसाब बनाकर शासन को भेजा जाएगा।
सबसे अधिक पैसा बिजली के लिए चाहिए
विभागीय अधिकारियों की माने तो सबसे अधिक खर्च बिजली का होगा। पांच साल में नंदपुर स्थित इंटेक प्लांट और सैलई स्थित प्लांट के साथ टंकियों को भरने में कितने रुपये की बिजली खर्च होगी। इसका हिसाब लगाया जा रहा है।