अरबों के घोटाले में फंसे नोएडा प्राधिकरण के चीफ इंजीनियर यादव सिंह की सुहाग नगरी में संपत्ति होने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता। सुहागनगरी के कई कालोनाइजर देखते ही देखते करोड़ों के मालिक बन गए। सूत्रों का मानें तो यादव सिंह ने खुद सीधे खरीदारी करने के बजाय इनको ही माध्यम बनाकर पैसा लगाया है। उधर पूर्ति विभाग ने यादव सिंह की साले की पत्नी के नाम राशन की दुकान की पड़ताल शुरू कर दी है।
नोएडा विकास प्राधिकरण के चीफ इंजीनियर यादव सिंह और उसकी पत्नी कुसुमलता पर आयकर विभाग एवं ईडी का शिकंजा कसते ही रिश्तेदार व ससुरालपक्ष के करीबी भी परेशान हैं। सूत्रों का कहना है कि यादव सिंह का जुड़ाव सुहागनगरी के कुछ कालोनाइजरों से भी हो गया था। बसपा सरकार में उसने सीधे कोई खरीदारी करने के बजाय इनके ही माध्यम से बड़ी जमीनों में अपना पैसा लगाया है। उधर यादव सिंह के साले की पत्नी के नाम संचालित होने वाली राशन की दुकान के मामले में पूर्ति विभाग ने पड़ताल शुरू कर दी है। जिला पूर्ति अधिकारी शरदकुमार स्वर्णकार ने कहा कि यदि यहां विद्यारानी नहीं रहती हैं और दुकान का संचालन किया जा रहा है तो उसे निरस्त करने की कार्रवाई की जाएगी।
रातों-रात करोड़पति बना चेहरा चर्चा में
यादव सिंह मामले में कुछ कंपनियों के खुलासे भी हुए हैं। इनमें एक कंपनी शहर के ही एक ऐसे शख्स की बताई गई है जो चंद दिनों में फर्श से अर्श पर पहुंच कर रातों-रात करोड़पति बन गया। बसपा सरकार मेंएक कबीना मंत्री के साथ मिल कर जमीन की कुछ बड़ी डील हुई थीं। इस डील में जिस कंपनी का नाम आया है उसके तार यादव सिंह से जुड़े हैं और यह कंपनी शहर के ही उस शख्स की बताई गई है जिसने अपना आशियाना अब आगरा में बना लिया है।
नौकरियां तक लगवाईं
शहर के कई लोगों की यादव सिंह ने अपने प्रभाव पर प्राइवेट सेक्टर में नौकरी लगवाई थी। तत्कालीन बसपा सरकार में यादव सिंह की इतनी तूती बोलती थी कि स्थानीय बसपा नेता और अधिकारी सिफारिश कराने में यादव सिंह की पत्नी की मदद लेते थे।