फीरोजाबाद। कांच को चूड़ियों व मनचाहे आकार ढालने में माहिर हाथ और मेहनती उद्यमी, दोनों ने मिलकर देश ही नहीं विदेशियों को भी चूड़ियों की खनक और कांच उत्पादों की चमक से लुभाया। दुनिया भर में फीरोजाबाद यानी सुहाग नगरी को एक पहचान दी। आज फीरोजाबाद की यही पहचान संकट में है। बाजार में सस्ते विदेशी उत्पाद चुनौती बन रहे हैं तो इंसपेक्टर राज और सरकारी तंत्र की मनमानी यहां के कांच उद्योग की जड़ों में मट्ठा डालने का कार्य कर रहा है। औद्योगिक विकास की राह में दुश्वारियां ही दुश्वारियां है। इन दुश्वारियों को दूर करने के लिए जिम्मेदार सरकारी महकमे और एजेंसियां इन्हें और बढ़ रहे हैं। यूपीएसआईडीसी हो या कोई अन्य विभाग एक एनओसी लेना भी आसमान से तारे तोड़कर लाने जैसा है। एनजीटी और टीटीजेड के आदेशों पर पाबंदियां तो तुरंत लागू हो जाती है लेकिन समाधान की दिशा में कोई पहल नहीं होती। पर्यावरण प्रदूषण के नाम उत्पीड़न तो खूब होता है, समस्या का समाधान नहीं किया जाता। करोड़ों रुपये लगाकर उद्योग शुरू करते है लेकिन कब वह बंद करा दिया जाए, इसक ी कोई गारंटी नहीं। ये निष्कर्ष अमर उजाला एमएसएमई कान्क्लेव से पूर्व बुधवार को फीरोजाबाद में उद्यमियों के साथ गेट टु गेदर मीट के दौरान निकलकर सामने आया। इस मीट में दि ग्लास इंडस्ट्रियल सिंडीकेट,यूपी ग्लास मैन्यूफैक्चर्स सिंडीकेट व द ग्लास मैन्यूफैक्चर्स एक्सपोर्ट एसोसिएशन के पदाधिकारियों के अलावा सूक्ष्म और लघु एवं मध्यम उद्योगों से जुड़े उद्यमी शामिल हुए। इन सभी का कहना है कि उद्योग जगत के सामने दुश्वारियों को दूर करना ही होगा। मेक इन यूपी का सपना तभी पूरा होगा, जब विदेश बाजार में मिल रही चुनौतियों और तकनीक के अनुरूप फीरोजाबाद के उद्योग खुद को ढाले, साथ ही सरकारी नीति में परिवर्तन की जरूरत है।
कांच और चूड़ी उद्योग की चुनौतियां
ग्लास उद्योग पर वैट एवं एक्साइज ड्यूटी का भारी बोझ
कारपोरेट कंपनियों व छोटे उद्योगों के लिए समान टैक्स प्रणाली
चीन व वियतनाम से मिल रही सस्ते माल की चुनौती
कांच की जगह प्लास्टिक उत्पादों का बढ़ता उपयोग और बाजार
इस दिशा में भी हो पहल
-सिंगल विंडो सिस्टम को प्रभावी बनाए, अधिकारियों की जिम्मेदारी तय हो
-एनजीटी, टीटी जोन की समस्याओं के निस्तारण को एक अधिकारी तैनात हो।
-श्रम कानूनों में फीरोजाबाद समस्याओं के अनुरूप संशोधन किया जाए।
-रॉ-मैटेरियल की आपूर्ति करने वाली कंपनियों की मनमानी पर अंकुश लगे।
बैठक में दि ग्लास इंडस्ट्र्यिल सिंडीकेट के अध्यक्ष हनुमान प्रसाद गर्ग,यूपीजीएमएस के अध्यक्ष राजकुमार मीत्तल,प्रमुख उद्यमी देवीचरन अग्रवाल, प्रदीप गुप्ता, मोहनबाबू अग्रवाल, एक्सपोर्ट एसोसिएशन के मुकेश बंसल टोनी, पीके झिंदल, नजमी भाई, प्रमोद कुमार जैन, राजेंद्र कुमार जैन राजू, सौरभ शास्त्री, सौभाग्य शर्मा, अनिल मैनेजर, मनोज मित्तल, आदि प्रमुख रूप से शामिल थे।