बताया कि दरोगा सैलरी नहीं दे रहे थे। जरूरत होने पर बार-बार रुपये मांगने पर एक बार उसे पीट भी दिया था। इसके कारण वह मन ही मन में कुंठित रहने लगा था। पुलिस की पूछताछ में धीरज ने अपने बचाव में दरोगा के परिवार के एक सदस्य को शक के घेरे में ला दिया। लेकिन, पुलिस की जांच में सारे आरोप निराधार मिले।
यह था पूरा मामला
हत्या का खुलासा करते हुए एसपी ग्रामीण कुमार रणविजय सिंह ने बताया कि दरोगा की हत्या के बाद से ही पूरे जिले में अलर्ट कर दिया गया था। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने चार टीमें गठित कर शीघ्र खुलासा करने के निर्देश दिए थे। घटना के बाद सबसे संदिग्ध नौकर धीरज ही लग रहा था। इस कारण उसे हिरासत में लिया गया था। उससे आठ घंटे से ज्यादा कई लोगों ने पूछताछ की। काफी समय तक उसने पुलिस को गुमराह किया, लेकिन सख्ती दिखाई तो वह टूट गया। उसने हत्या की बात स्वीकार की है। पुलिस ने उसकी निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त तमंचा भी बरामद कर लिया।
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एसपी के अनुसार पूछताछ में धीरज ने बताया कि वह दरोगा के पास तीन माह पूर्व अरांव आया था। उनके घर का काम करने व लिखापढ़ी में सहयोग के लिए दरोगा ने उसे 10 हजार रुपये महीने पर रखा था। एक महीने की तो पगार उसे दे दी, लेकिन पिछले दो माह के वेतन को लेकर दरोगा से आए दिन कहासुनी हो रही थी। बताया कि एक दिन दरोगा ने उसकी बेइज्जती कर दी। इसके बाद उसने उन्हें ठिकाने लगाने की सोच ली।
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तीन अगस्त को वह सब्जी लेने के बहाने दरोगा की बाइक पर उनके साथ गया। जब दरोगा चंदपुरा में विवेचना कर रहे थे, तभी उसने गांव में स्थित ठेके से शराब खरीद कर पी। जिस से वह नशे में धुत्त हो गया। उप निरीक्षक उसको बाइक पर बैठाकर चौकी की तरफ चल दिए। इसी दौरान चंदपुरा व पीथेपुर के बीच लघुशंका के बहाने बाइक रुकवाई। वहीं पर दरोगा से रुपये को लेकर कहासुनी हो गई। नशे में होने के कारण उसने अपने पास रखे तमंचा से दरोगा की गर्दन में सटाकर फायर कर दिया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।