बेमौसम बारिश ने ठिठुरन बढ़ा दी। गलियों और मुख्य मार्गों पर जलभराव हो गया। सर्दी से बचाव को हर कोई गरम कपड़ों का इंतजाम करता दिखाई दिया। फसलों के लिए बारिश लाभदायक है। गरीब बेसहारा लोग कूड़ा करकट से अलाव जलाकर बैठे दिखाई दिए। बारिश के कारण बाजार समय से पहले बंद हो गया।
शनिवार को मौसम ने करवट बदली। सुबह सूर्यदेव के दर्शन नहीं हुए, दस बजे से रिम-झिम बारिश का क्रम शुरू हुआ तो शाम तक नहीं थमा। गलियों के साथ मुख्य मार्गों पर जलभराव हो गया। सर्दी में इजाफा होने के साथ बुजुर्ग एवं बच्चे ही नहीं युवा भी कांपते दिखाई दिए। बारिश के कारण अन्नदाता को चिंता सताती रही कि यदि ज्यादा पानी बरसा तो आलू के साथ गेहूं की फसल प्रभावित होगी।
दिसंबर माह का दूसरा सप्ताह बीतने के करीब आ गया था लेकिन लोगों को सर्दी का अहसास नहीं हो रहा था। पिछले दो दिनों से मौसम का मिजाज बदल गया था। कभी घटाएं तो कभी आसमान साफ दिखा। शनिवार की सुबह तो घटाएं काफी तेज घिरीं। धूप नहीं खिली और दस बजे के करीब बारिश होना शुरू हो गई, कभी धीमी तो कभी तेज बारिश का क्रम सुबह से शाम तक चलता रहा। जैसे ही बारिश थमती लोग आवश्यक काम निपटाते दिखाई देते।
बारिश के कारण जलेसर रोड, बोधाश्रम रोड के साथ गांधीपार्क, रामलीला चौराहा, कोटला रोड, तिलक नगर, चंद्रवार गेट रेलवे पुल, शिवाजी मार्ग, बस स्टेंड के भी निकट जलभराव दिखाई दिया। दुकानों पर ग्राहक नहीं पहुंचे। रात को बाजार जल्दी बंद हो गया।
गरम कपड़ों की बढ़ी डिमांड
बाजार में बारिश एवं सर्दी में इजाफा होने के साथ गरम कपड़ों की डिमांड अचानक बढ़ गई। मफलर, स्वेटर के साथ जैकेट आदि की खरीदारी लोग कर रहे थे।
बढे़ंगी लकड़ी एवं कोयला की कीमतें
बारिश और शीतलहर के कारण बाजार में अलाव जलाने के लिए लकड़ी एवं कोयले की डिमांड भी बढ़ेगी। बाजार में लकड़ी, कोयला एवं उपलों की कीमतें पांच से दस रुपये प्रति पांच किलोग्राम पर बढ़ने की संभावना है। क्योंकि सूखी लकड़ी मिलना मुश्किल होगा।
सब्जियों के राजा आलू के बढ़ेंगे भाव
बाजार में सब्जियों का राजा नया आलू आना शुरू हो गया है। बारिश होने के साथ आलू की खुदाई प्रभावित होना तय है। इसके कारण नए आलू की आवक रुक जाएगी। वर्तमान में 20 रुपये में तीन किलोग्राम आलू बिक रहा है।
स्कूल से भीगते हुए घर लौटे छात्र
सुबह करीब दस बजे से शुरू हुआ बारिश का क्रम थमा नहीं। इसके कारण स्कूल गए छोटे-छोटे बच्चे भी भीगते हुए लौटे। अधिकांश अभिभावक स्कूल में ही बच्चों को लेने पहुंच गए। क्योंकि गलियों में पानी भरा था।
बीमारी से बचाएं आलू को
फीरोजाबाद(ब्यूरो)। जिला उद्यान अधिकारी बलजीत सिंह ने कहा बारिश के साथ मौसम में नमी आने के कारण आलू में झुलसा रोग लगने की संभावना बढ़ गई है। आलू में अगेती और पिछेती झुलसा रोग लग सकता है।
ऐसे करें फसल का बचाव
अगेती एवं पिछेती झुलसा से बचाव को आलू उत्पादक किसान मेगनीज कार्बामेंट 2.0 से 2.5 किलोग्राम को 800 या एक हजार लीटर पानी में घोल बनाकर प्रति हेक्टेयर की दर से बुवाई के 30 या 40 दिन के बाद रक्षात्मक छिड़काव अवश्य करें।
10 से 15 दिन के अंतराल में दूसरा छड़काव कापर ऑक्सीक्लोराइड 2.5 से तीन किलोग्राम अथवा जिंक मैग्नीज कार्बामेंट दो या ढाई किलोग्राम दोनों में से किसी एक का 800 या एक हजार लीटर पानी में घोल बनाकर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें। ताकि झुलसा से बचाव हो सके।