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सीजन में भी मंदी की मार,कांच चूडी उद्योग लगेगी 200 करोड की चपत

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फिरोजाबाद। श्रावण मास में मंदी की मार से उभरने की आस में बैठे चूड़ी उद्योग जगत की आस को जुड़ाई श्रमिकों की हड़ताल से पलीता लग गया है। श्रावण मास में देेेश के पूर्वोत्तर राज्यों व पड़ोसी देशों में हरी व रेशम निर्मित सतरंगी चूड़ियों की मांग खासी रहती है लेकिन जुड़ाई श्रमिकों की हड़ताल के कारण कारखानों में चूड़ी उत्पादन ठप होने के साथ ही फैंसी व कलात्मक चूड़ी तैयार कराने का काम प्रभावित है।
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कोरोना संक्रमण के कारण करीब छह माह से फिरोजाबाद के चूड़ी उद्योग जगत को तकरीबन 200 करोड़ से ज्यादा की चपत लग चुकी है। अब चूड़ी उद्योग को सावन के महीने में चूड़ी की डिमांड बढ़ने की खासी उम्मीद थी। इन दिनों पूर्वोत्तर राज्यों के अलावा पड़ोसी देशों में सतरंगी रेशम चूड़ी, हरी व लाल चूड़ियों की भारी मांग रहती है लेकिन चूड़ी जुड़ाई श्रमिकों की काम बंद हड़ताल के कारण कारखानों में सादा, लस्टर व रेशम चूड़ी का उत्पादन ठप है। हड़ताल के कारण कारखानों से गोदामों तक चूड़ी का परिवहन भी अवरुद्ध है। ऐसे में कलात्मक व फैंसी चूड़ी बनाने वाले गोदामों में भी सन्नाटा रहा।
यहां पर भी दिख रहा जुड़ाई श्रमिकों की हडताल का असर
- हड़ताल के कारण चूड़ी पकाई भट्ठियों पर कार्यरत श्रमिकों की आजीविका भी बेपटरी
- हजारों चूड़ी गोदामों में कार्यरत पैकर, छटईया, हिल व पॉलिश कारीगरों के समक्ष बेरोजगारी का संकट
गोदाम स्वामी की बात-
फैंसी एवं कलात्मक चूड़ी की बिक्री के लिए यह सबसे बढ़िया समय है लेकिन जुड़ाई नहीं होने पाने के कारण सादा चूड़ी गोदामों तक नहीं पहुंच पा रही है। इस कारण से हरियाली तीज अन्य त्योहारों पर माल पूरा कराने में परेशानी हो रही है।
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शिवशंकर गुप्ता, चूड़ी गोदाम स्वामी, पैमेश्वर गेट
श्रावण मास में चूड़ी गोदामों सादा चूड़ी की खपत होती है लेकिन जब जुड़ाई नहीं हो पा रही तो कारखानों से सादा चूड़ी का उठान भी ठप है। त्योहारी सीजन उठान नहीं होने से चूड़ी उद्योग जगत को 200 करोड़ की चपत लगना स्वाभाविक है।
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संजय जैन घंटू चूड़ी कारखानेदार
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